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India takes a firm stand on the deaths of Indian sailors; US diplomat summoned for the second time.
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। ओमान तट के पास भारतीय नाविकों वाले व्यापारिक जहाजों पर हुई सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि नागरिक जहाजों पर घातक बल का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
एक हफ्ते में दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को बुलाया गया
भारत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार तलब किया। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नाविकों की मौत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक ऐसी त्रासदी थी जिसे टाला जा सकता था।भारत ने स्पष्ट किया कि व्यापारिक जहाजों पर सैन्य कार्रवाई से वैश्विक समुद्री व्यापार और नौवहन की सुरक्षा प्रभावित होती है, इसलिए ऐसे कदम बेहद चिंताजनक हैं।
तीन भारतीय नाविकों की मौत से बढ़ी गंभीरता
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हालिया घटनाओं में भारतीय नागरिकों की जान गई है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है। भारत ने कहा कि समुद्री मार्गों पर चलने वाले नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है।
ट्रम्प का दावा, भारत ने नहीं की पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि होर्मुज क्षेत्र से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर ईरान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था। हालांकि भारत सरकार ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।ट्रम्प के बयान ने इस पूरे मामले को और अधिक जटिल बना दिया है, क्योंकि अमेरिकी सैन्य कमान पहले ही इन कार्रवाइयों की जिम्मेदारी ले चुकी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ली थी कार्रवाई की जिम्मेदारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पहले कहा था कि जिन जहाजों पर कार्रवाई की गई, वे कथित रूप से अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहे थे। इसी आधार पर सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश की गई थी।हालांकि भारत का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में नागरिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
ईरान ने भी जताई चिंता
ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम की आलोचना करते हुए कहा कि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाइयां वैश्विक शांति और समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करती हैं। तेहरान ने भारतीय नाविकों की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना भी प्रकट की।
कुछ दिनों में तीन जहाज बने कार्रवाई का निशाना
जानकारी के अनुसार, 8 जून को पलाऊ ध्वज वाले एमटी मैरिवेक्स, 10 जून को एमटी सेट्टेबेलो और 11 जून को गिनी-बिसाउ ध्वज वाले एमटी जलवीर पर कार्रवाई की गई।
एमटी मैरिवेक्स पर मौजूद सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया।
एमटी सेट्टेबेलो पर सवार 24 भारतीयों में से तीन की मौत हो गई।
एमटी जलवीर के सभी 20 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी हुई तेज
इस घटना को लेकर देश की राजनीति में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। Rahul Gandhi ने भारतीय नागरिकों की मौत पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। वहीं Pinarayi Vijayan ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित समुद्री मार्गों की मांग को मजबूती से उठाना चाहिए।
समुद्री सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल
भारतीय नाविकों की मौत और लगातार हो रही सैन्य कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत, अमेरिका और अन्य संबंधित देशों के बीच आगे क्या कूटनीतिक कदम उठाए जाते हैं।