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Indian hockey team to wear saffron jersey for the first time at the World Cup; opponents raise questions.
नई दिल्ली। अगले महीने 15 से 30 अगस्त के बीच नीदरलैंड्स और बेल्जियम में आयोजित होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें पारंपरिक नीली जर्सी की जगह नई केसरिया (सैफ्रन) जर्सी पहनकर मैदान में उतरेंगी। हॉकी इंडिया ने इस नई जर्सी का अनावरण करते हुए बताया कि इसमें देवनागरी लिपि में 'इंडिया', अशोक चक्र, सुदर्शन चक्र की डिजाइन और तिरंगे की पाइपिंग शामिल की गई है। टीम के लिए एक सफेद जर्सी का विकल्प भी रखा गया है।
हॉकी इंडिया के अनुसार नई जर्सी का चयन खिलाड़ियों की सहमति से किया गया है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से खिलाड़ियों को नीले सिंथेटिक टर्फ पर नीली जर्सी के कारण दृश्यता (विजिबिलिटी) में परेशानी होती थी। इसी वजह से रंग बदलने का निर्णय लिया गया।
हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया कि भारतीय टीम की जर्सी का रंग पहले भी बदला जा चुका है। वर्ष 2014 में टीम ने पीली जर्सी, जबकि 2018 में स्काई ब्लू जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेले थे।
नई जर्सी को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश की खेल टीमों पर केसरिया रंग थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रासक्विन्हा और वी. बास्करन ने भी इस बदलाव पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि भारतीय हॉकी की दशकों पुरानी नीली जर्सी उसकी पहचान रही है, जिसे बदलना उचित नहीं है। दोनों पूर्व खिलाड़ियों ने इस फैसले को "शर्मनाक" बताते हुए कहा कि इससे भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंचा है।
एक ओर हॉकी इंडिया इसे खिलाड़ियों की सुविधा और आधुनिक डिजाइन से जुड़ा फैसला बता रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों और पूर्व खिलाड़ियों के विरोध के चलते नई केसरिया जर्सी चर्चा का विषय बन गई है। अब सभी की नजरें वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के प्रदर्शन के साथ-साथ इस नई पहचान पर भी रहेंगी।