

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Invalid driving license accident compensation Supreme Court
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि सड़क दुर्घटना के समय वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस वैध नहीं था या उसका ड्राइविंग लाइसेंस समय पर नवीनीकरण नहीं कराया गया था या उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था, तो बीमा कंपनी को दुर्घटना मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसी सूरत में चालक या वाहन मालिक या दोनों को दुर्घटना के मामलों में भारी मुआवजा देना पड़ सकता है। इसी के साथ कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी की जिम्मेदारी डालते हुए उसे 1.08 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति संजय करौल और एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा सभी राज्यों के परिवहन विभागों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर देशव्यापी जनजगस्कता अभियान चलाने का निर्देश दिया।
यह मामला वर्ष 2009 में हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें एक कार ने दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने पाया कि चालक ओमप्रकाश का लाइसेंस दुर्घटना से काफी पहले समाप्त हो चुका था और बाद में उसका नवीनीकरण कराया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दुर्घटना के वक्त लाइसेंस वैध नहीं था, तो बीमा कंपनी को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि सड़क सुरक्षा व यातायात नियमों के पालन को लेकर देशव्यापी जन जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इंटरनेट मीडिया, जनसंचार माध्यमों और अन्य प्लेटफार्मों के माध्यम से लोगों को वैध ड्राइविंग लाइसेंस के महत्व के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने की जरूरत भी बताई। सुप्रीम कोर्ट ने ड्राइविंग स्कूलों के बेहतर रेग्युलेशन, उनकी किफायती व्यवस्था और क्षेत्रीय भाषाओं में आवेदन एवं परीक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि इन क्षेत्रों में तत्काल सुधार की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक लोग नियमों के अनुरूप लाइसेंस प्राप्त कर सकें।