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Is a fake SIM card operating in your name? It carries a penalty of up to 3 years in prison and a fine of up to ₹50 lakh—here’s how to check immediately.
रायपुर। मोबाइल SIM का गलत इस्तेमाल अब केवल साइबर ठगों के लिए ही नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के लिए भी गंभीर कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है जिसके नाम पर कनेक्शन जारी हुआ है। छत्तीसगढ़ में पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर फर्जी SIM जारी किए जाने का मामला सामने आने के बाद दूरसंचार विभाग ने देशभर के मोबाइल यूजर्स को सावधान किया है।विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर SIM लेना, किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करना या अपने नाम पर जारी कनेक्शन को धोखाधड़ी के लिए किसी और को देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत 3 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
दूरसंचार विभाग के मुताबिक छत्तीसगढ़ में एक पॉइंट ऑफ सेल एजेंट ने नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनकी जानकारी या सहमति के बिना 25 मोबाइल कनेक्शन सक्रिय कर दिए थे।मामले की जानकारी मिलने के बाद विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर कार्रवाई की। संबंधित एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और उसके आउटलेट को भविष्य में मोबाइल कनेक्शन जारी करने से रोक दिया गया।इन 25 मोबाइल नंबरों की जांच डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए की गई। संदिग्ध पाए गए कनेक्शनों को दोबारा सत्यापन के लिए भेजा गया, लेकिन सत्यापन में विफल रहने के बाद उन्हें निष्क्रिय कर दिया गया।
दूरसंचार विभाग ने केवल फर्जी SIM को लेकर ही चेतावनी नहीं दी है। मोबाइल फोन के IMEI नंबर से छेड़छाड़ करना या बदले हुए IMEI वाले हैंडसेट का इस्तेमाल करना भी कानून के दायरे में आता है।इसी तरह कॉल करते समय वास्तविक मोबाइल नंबर की जगह किसी दूसरे व्यक्ति का नंबर दिखाई देना और इसके लिए कॉलिंग ID में हेरफेर करना भी गंभीर उल्लंघन माना जाता है।विभाग के अनुसार टेलीकॉम संसाधनों का इस्तेमाल साइबर अपराध, धोखाधड़ी या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
देश के अधिकांश हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह सीमा 6 मोबाइल कनेक्शन है।दूरसंचार कंपनियों को डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से अपने सिस्टम को जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य संदिग्ध कनेक्शन और निर्धारित सीमा से ज्यादा SIM रखने वाले मामलों की पहचान करना है।
मोबाइल यूजर्स को सलाह दी गई है कि वे संचार साथी पोर्टल या ऐप के जरिए अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी जांचें।अगर सूची में ऐसा मोबाइल नंबर दिखाई देता है जिसका इस्तेमाल आप नहीं करते हैं या जिसे आपने जारी नहीं कराया है, तो उसकी रिपोर्ट की जा सकती है। यह जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आपके दस्तावेजों के जरिए जारी किया गया कोई SIM किसी साइबर अपराध में इस्तेमाल होने पर जांच का हिस्सा बन सकता है।सरकार ने 23 अगस्त से डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म में एक नया फीचर भी जोड़ा है। इसके जरिए निर्धारित सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन वाले मामलों की पहचान के लिए फोटो और अन्य विवरणों का मिलान किया जा सकेगा। टेलीकॉम कंपनियों को सरकारी प्लेटफॉर्म से अपने सिस्टम को जोड़ने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है।
छत्तीसगढ़ में SIM फर्जीवाड़े का एक मामला पहले भी सामने आ चुका है। जांच के दौरान पता चला था कि 410 से ज्यादा लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनके नाम पर अतिरिक्त SIM जारी किए गए थे। बाद में इन कनेक्शनों के साइबर ठगों तक पहुंचने की बात सामने आई।इस मामले में पुलिस ने मध्यप्रदेश के मैहर निवासी रामकृष्ण कुशवाहा को गिरफ्तार किया था। जांच के मुताबिक आरोपी रायपुर के गुढियारी इलाके में रह रहा था और मोबाइल SIM बेचने का काम करता था।आरोप है कि दुकान पर SIM लेने आने वाले ग्राहकों से दस्तावेज लेने के बाद उनसे बायोमेट्रिक मशीन पर दो बार अंगूठा लगवाया जाता था। इसके जरिए एक ही व्यक्ति के दस्तावेज पर दो SIM जारी हो जाते थे। एक कनेक्शन ग्राहक को दिया जाता, जबकि दूसरा आरोपी अपने पास रख लेता था।जांच में ऐसे 410 से ज्यादा अतिरिक्त SIM जारी किए जाने की बात सामने आई। आरोप है कि इन SIM को बाद में गोवा ले जाकर साइबर ठगों को बेच दिया गया।
पिछले एक साल के दौरान पुलिस ने फर्जी बैंक खाते खुलवाने, अवैध तरीके से SIM जारी कराने और साइबर ठगी से जुड़े मामलों में करीब 400 लोगों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान 3000 से ज्यादा बैंक खातों को होल्ड कराया गया।इन मामलों से जुड़े खातों के जरिए करीब 60 करोड़ रुपये की ठगी होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अपने नाम पर जारी SIM की समय समय पर जांच करना मोबाइल यूजर्स के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।