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It is the responsibility of us all to uphold the country's unity and integrity by learning from the pain of Partition.
रायपुर। राजधानी रायपुर में शुक्रवार को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। संचालनालय पुरातत्व स्थित मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 1947 के विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए कहा कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि वर्तमान को दिशा देने और भविष्य को सुरक्षित रखने की सीख भी देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की पीड़ा हमें देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को हर परिस्थिति में बनाए रखने का संदेश देती है। समारोह में विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष, साहस और धैर्य को नमन किया गया।
विभाजन सिर्फ भू-भाग का बंटवारा नहीं था
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वर्ष 1947 में हुआ देश का विभाजन केवल भू-भाग और सीमाओं का बंटवारा नहीं था। इस त्रासदी ने लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि, घर-बार और अपनों से बिछड़ने के लिए मजबूर कर दिया। बंगाली, सिख और सिंधी समाज सहित अनेक समुदायों के लाखों परिवारों ने विस्थापन की असहनीय पीड़ा झेली।

उन्होंने कहा कि उस दौर की भयावहता को अपनी आंखों से देखने वाले अधिकांश लोग आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके परिवारों और आने वाली पीढ़ियों की स्मृतियों में वह पीड़ा आज भी जीवित है।
शून्य से शुरू किया नया जीवन
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन के बाद विस्थापित हुए लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में नए स्थानों पर लगभग शून्य से अपना जीवन शुरू किया। अपने अथक परिश्रम, पुरुषार्थ और जीवटता के बल पर उन्होंने खुद को दोबारा स्थापित किया और देश तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों का संघर्ष, साहस और धैर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी स्मृतियों और अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
14 अगस्त को स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के बलिदान और विस्थापित परिवारों के संघर्ष को सम्मान देने तथा नई पीढ़ी को इतिहास के इस अध्याय से परिचित कराने के उद्देश्य से 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल अतीत की पीड़ा को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि विभाजन से मिली सीख के आधार पर राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करने का भी अवसर है।
विकसित भारत के संकल्प में एकजुट समाज की भूमिका
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का सपना एकजुट और सशक्त समाज की नींव पर ही पूरा किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भी विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है। विभाजन की विभीषिका झेलने वाले परिवारों और उनकी पीढ़ियों के साथ राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है।
डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने किया एकता का आह्वान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि यदि समाज संगठित रहेगा तो राष्ट्र भी संगठित रहेगा। भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण विस्थापित हुए लाखों लोगों के संघर्ष और त्याग को इतिहास में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे अधिकारी थे। इन लोगों ने अपना घर, संपत्ति और अपनों को खोने के बावजूद कठिन परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन खड़ा किया और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया।
डॉ. द्विवेदी ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारण का दायित्व सिरिल रेडक्लिफ को सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि विभाजन से उपजी पीड़ा और उसके परिणामों को समझना आज भी जरूरी है, क्योंकि इतिहास से मिली सीख भविष्य के लिए समाज को सचेत करती है।
‘पिंजर’ के जरिए विभाजन की पीड़ा को किया चित्रित
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का स्वागत करते हुए भारतीय इतिहास, संस्कृति और साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. द्विवेदी ने अमृता प्रीतम के उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘पिंजर’ के माध्यम से विभाजन की त्रासदी और मानवीय पीड़ा को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया है।
विभाजन पीड़ित परिवारों ने साझा कीं स्मृतियां
समारोह में विभाजन का दंश झेलने वाले विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों और उनके परिवारजनों ने अपने अनुभव और स्मृतियां साझा कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से विभाजन की त्रासदी झेलने वाले अनेक लोग आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी पीढ़ियां उनकी स्मृतियों और संघर्ष की विरासत को संभालकर रखे हुए हैं।
मौन जुलूस में शामिल हुए मुख्यमंत्री
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय संचालनालय पुरातत्व से अंबेडकर चौक तक आयोजित मौन जुलूस में भी शामिल हुए। मौन जुलूस के माध्यम से विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।
जुलूस में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और विद्यार्थी शामिल हुए। सभी ने विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल एवं लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा एवं मोतीलाल साहू, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, संत युधिष्ठिर लाल, स्वामी शिवस्वरूपानंद, राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज कुमार झा, यशवंत जैन, डॉ. नवीन मार्कण्डेय सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी मौजूद रहे।