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Jagdalpur land resale fraud case conviction upheld
करीब चार दशक (40 वर्ष) पहले बेची गई जमीन को दोबारा बेचने के गंभीर धोखाधड़ी मामले में जगदलपुर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ अग्रवाल की अदालत ने पटवारी समेत चार आरोपितों की दोषसिद्धि और दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा को बरकरार रखा है। सजा पाने वालों में जगदलपुर के कारोबारी और पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोहर लुनिया भी शामिल हैं। 16 अक्टूबर 2026 को पारित अपने फैसले में न्यायालय ने आरोपितों की ओर से दायर दोनों दांडिक अपीलों को खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
प्रकरण के अनुसार, पीड़िता वंदिता पटनायक के पिता बी. राधाकृष्णन ने 27 अगस्त 1984 को जगदलपुर देहात के पटवारी हल्का नंबर 100 स्थित खसरा नंबर 89/10 की 4,800 वर्गफीट जमीन पंजीकृत विक्रय पत्र (रजिस्टर्ड सेल डीड) के माध्यम से खरीदी थी। नामांतरण और बटांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस जमीन को नया खसरा नंबर 89/41 आवंटित हुआ और राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज हो गया।
मई 2009 में सामने आई गड़बड़ी
मई 2009 में जब वंदिता अपने पति के साथ उक्त जमीन पर मकान बनवाने पहुंचीं, तो उन्होंने देखा कि वहां दूसरे लोग निर्माण कार्य करा रहे थे। जब जमीन का सीमांकन कराया गया, तब यह खुलासा हुआ कि उक्त जमीन की दोबारा बिक्री कर दी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2010 में कोतवाली थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई।
मामले की सुनवाई करते हुए विचारण न्यायालय ने 22 सितंबर 2018 को पटवारी नरेंद्र कुमार सोनी, पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोहर लुनिया, मूलचंद लुनिया, बीरचंद्र लुनिया को धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।
आरोपितों ने इस फैसले के खिलाफ अपीलीय अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज करते हुए विचारण न्यायालय द्वारा दी गई सजा को यथावत रखा है।