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Jaishankar expresses concern over maritime attacks; new India-Liberia initiative for the safety of ships and seafarers... 77 countries walk out of Netanyahu's speech.
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान शुक्रवार को कई अहम घटनाक्रम सामने आए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जहाजों और नाविकों पर बढ़ते हमलों को वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। इसी दौरान भारत और लाइबेरिया ने समुद्री सुरक्षा के लिए 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' पहल शुरू की। दूसरी ओर, पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर जयशंकर की तीखी प्रतिक्रिया चर्चा में रही। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों के बाहर जाने और ईरान के सात दिन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के प्रस्ताव ने भी सुर्खियां बटोरीं।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर समुद्री जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर हुई बैठक में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल पर हमले अब अलग-अलग घटनाएं नहीं रह गए हैं। खाड़ी, लाल सागर और काला सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में लगातार सामने आ रहे हमलों से वैश्विक व्यापार और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।भारत और लाइबेरिया ने ऐसे हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स' की शुरुआत की है। जयशंकर ने हालिया हमलों में भारतीय नाविकों के मारे जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ओमान की खाड़ी में दो दिन पहले एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत हुई थी।
यूएन मुख्यालय में प्रेस बातचीत के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए जयशंकर से सवाल किया। जवाब में विदेश मंत्री ने कहा, "एक आतंकी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है।" इस दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने भी पत्रकार से कहा कि उन्हें सवाल का जवाब मिल गया है।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान गाजा, ईरान और हिज्बुल्ला समेत क्षेत्रीय संघर्षों पर इजराइल का पक्ष रखा। उनके भाषण से पहले करीब 77 देशों के प्रतिनिधियों के बाहर जाने की खबर सामने आई। नेतन्याहू ने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को 'नैतिक कायर' कहा।अपने संबोधन में नेतन्याहू ने 2024 में हिज्बुल्ला के सदस्यों को निशाना बनाने के लिए किए गए पेजर विस्फोटों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिज्बुल्ला को वे पेजर याद हैं।
2024 में लेबनान में हिज्बुल्ला से जुड़े लोगों के इस्तेमाल किए जा रहे हजारों पेजरों में विस्फोट हुए थे। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए थे। इस घटना को हिज्बुल्ला के खिलाफ इजराइल की कार्रवाई से जोड़कर देखा गया था। नेतन्याहू ने यूएन भाषण में इसी घटना का संदर्भ देते हुए हिज्बुल्ला को संदेश देने की कोशिश की।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद से जुड़े सवाल भी पूछे गए। रिपोर्टों के मुताबिक, उनसे सईद के खिलाफ मुकदमे को लेकर सवाल किया गया, लेकिन उन्होंने जवाब देने के बजाय वहां से आगे बढ़ना पसंद किया। हाफिज सईद 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मामले में भारत द्वारा लंबे समय से वांछित आरोपी रहा है।
ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिन की एक नई योजना रखी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, जरूरी शर्तें पूरी होने पर ईरान सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल सकता है और इसके बाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर व्यापक बातचीत शुरू की जा सकती है।रिपोर्टों के अनुसार ईरान की शर्तों में अमेरिकी सैन्य दबाव कम करना, ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटाना और युद्धविराम जैसे कदम शामिल हैं। अराघची ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले समझौता होना बेहतर होगा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस सत्र में समुद्री व्यापार की सुरक्षा, पश्चिम एशिया का संघर्ष, ईरान का परमाणु कार्यक्रम और भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद से जुड़े आरोप जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। एक तरफ भारत ने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की पहल की, वहीं अमेरिका-ईरान तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर भी नजर बनी हुई है।