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Journalist Rajesh Ganodwale to be honoured with the Vasundhara Samman.
भिलाई। वसुंधरा एवं श्री चतुर्भुज मेमोरियल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार, 14 अगस्त को भिलाई के महात्मा गांधी कला मंदिर सभागार में राष्ट्रीय वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कीर्ति शेष देवीप्रसाद चौबे की स्मृति में स्थापित 26वां वसुंधरा सम्मान वरिष्ठ पत्रकार एवं संस्कृतिकर्मी राजेश गनोदवाले को प्रदान किया गया। उन्हें सांस्कृतिक एवं देशज पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन और रचनात्मक योगदान के लिए सम्मानित किया गया है।
राजेश गनोदवाले को सांस्कृतिक पत्रकारिता के क्षेत्र में देशभर में जाना जाता है। उन्होंने कला, संगीत, रंगमंच और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति जैसे विषयों पर लंबे समय तक गंभीर और तथ्यपरक पत्रकारिता की है। उनकी पत्रकारिता यात्रा तीन दशकों से अधिक समय की रही है। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एक प्रतिष्ठित दैनिक से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले गनोदवाले ने भारत रत्न पं. रविशंकर, ज्ञानपीठ सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल और प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक हबीब तनवीर जैसी विभूतियों पर जीवनीपरक एवं तथ्यपरक लेखन किया है। लोक अभिरुचि से जुड़े उनके आठ मोनोग्राफ भी प्रकाशित हो चुके हैं।
राजेश गनोदवाले को पत्रकारिता और साहित्य-संस्कृति के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हें वर्ष 2010 में चंदूलाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें ऋतुराज सम्मान (2000), राष्ट्रीय कला समीक्षा सम्मान (2011) तथा नाट्य लेखन के लिए साहित्य कला परिषद, नई दिल्ली का मोहन राकेश राष्ट्रीय सम्मान भी मिल चुका है।
वसुंधरा सम्मान की समृद्ध परंपरा
वसुंधरा सम्मान के माध्यम से पत्रकारिता, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जाता रहा है। पिछले वर्षों में स्व. रमेश नैयर, स्व. श्यामलाल चतुर्वेदी, स्व. कुमार साहू, स्व. बसंत कुमार तिवारी, स्व. विनोद शंकर शुक्ल, स्व. शरद कोठारी, स्व. बबन प्रसाद मिश्र, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, दिवाकर मुक्तिबोध, आशा शुक्ला, गिरिजाशंकर, ज्ञान अवस्थी, श्याम वेताल, अभय किशोर, डॉ. सुशील त्रिवेदी, गिरीश पंकज, स्व. बी.के.एस. रे, प्रकाश दुबे, स्व. तुषार कांति बोस, ई.वी. मुरली, सतीश जायसवाल, लीलाधर मंडलोई, सुधीर सक्सेना, डॉ. विश्वेश ठाकरे और राहुल देव जैसी हस्तियों को वसुंधरा सम्मान से नवाजा जा चुका है।
रमन सिंह ने संस्कृति और बस्तर को लेकर रखी बात
कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने राष्ट्रगीत, बस्तर और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मंच से 'वंदे मातरम' जैसे राष्ट्रभाव से जुड़े गीतों का गूंजना पूरे देश में व्यापक प्रभाव पैदा करेगा।
बस्तर में तिरंगा अभियान और बदलते माहौल का उल्लेख करते हुए रमन सिंह ने कहा कि दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और कोंटा-कुटरु जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के गांवों, स्कूलों और घरों में भी तिरंगा शान के साथ फहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद और आतंकवाद के प्रभाव से बाहर निकलने के बाद बस्तर के लोग आजादी का वास्तविक अर्थ और खुले माहौल में सांस लेने का अनुभव कर रहे हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और प्राचीन इतिहास को भी महत्वपूर्ण बताया। रमन सिंह ने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक हजारों वर्षों की सांस्कृतिक परंपराएं बिखरी हुई हैं। यहां मूर्तिकला सहित जैन धर्म, बौद्ध धर्म और सनातन परंपरा से जुड़े अनेक ऐतिहासिक अवशेष मिलते हैं। उन्होंने कहा कि ईसा पूर्व की कई शताब्दियों से जुड़े अवशेष छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रमाणित करते हैं।
रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों को मजबूत करने की जरूरत है। इस दिशा में संगोष्ठी में सामने आए सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा और मुख्यमंत्री से भी इस संबंध में चर्चा की जाएगी।
26वें वसुंधरा सम्मान के माध्यम से राजेश गनोदवाले का सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पत्रकारिता और लोककलाओं के प्रति उनके तीन दशक से अधिक लंबे योगदान को रेखांकित करेगा।