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Kangana Ranaut lashes out at the Gen-Z movement, says, Abusing the 75 year old Prime Minister and his late mother is shameful
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का प्रदर्शन समाप्त हो गया है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों को सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन खत्म हुआ। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं, लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर करीब 10 घंटे तक मैराथन चर्चा जारी रही।
प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहरा गया। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा, जहां भाजपा सांसदों ने इसकी आलोचना की।
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि छात्र आंदोलनों में असहमति जताई जा सकती है, लेकिन अशोभनीय भाषा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोग किस तरह के छात्र हैं। कंगना ने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं कम उम्र में अपना करियर शुरू किया और कभी अपने माता-पिता पर बोझ नहीं बनीं।
पेपर लीक रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 का समर्थन करते हुए कंगना रनौत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है और यह विधेयक परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
कंगना रनौत ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशहित में हर छोटे-बड़े मुद्दे के समाधान के लिए मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई है। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान शिक्षा का बजट सीमित था, जबकि वर्तमान सरकार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम कर रही है। उनके अनुसार, संशोधन विधेयक सरकार की परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।