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Police claim in Jantar Mantar violence case: 989 individuals with criminal records identified; Supreme Court also expresses concern.
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा सुधारों की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में हिंसा की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों की पहचान करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से अब तक 989 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोगों पर पहले से ही संदेह था कि आंदोलन की आड़ में बाहरी असामाजिक तत्व शामिल हो सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में एआई आधारित फेस रिकग्निशन कैमरे लगाए गए थे।पुलिस का कहना है कि करीब 2,873 प्रदर्शनकारियों के डाटा की जांच की गई, जिसमें 989 लोगों का पुराना गंभीर या जघन्य आपराधिक इतिहास सामने आया। इनमें कुछ आदतन अपराधी और हिस्ट्रीशीटर भी शामिल बताए गए हैं।पुलिस के अनुसार, जांच से यह संकेत मिले हैं कि हिंसक घटनाओं में केवल छात्र या सामान्य प्रदर्शनकारी ही शामिल नहीं थे, बल्कि कुछ आपराधिक तत्व भी भीड़ में मौजूद थे।
वहीं, प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण बताया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी आंदोलन के नाम पर पुलिस की ज्यादती या अनावश्यक बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को व्यवस्थित करने और असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए देशभर में एक समान प्रोटोकॉल की जरूरत बताई।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है, चाहे वह प्रदर्शनकारी हो या पुलिसकर्मी।शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि किसी पक्ष की ओर से ज्यादती हुई है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों के लिए एक संतुलित व्यवस्था और समान दिशा-निर्देश जरूरी हैं।
इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर चंडीगढ़ जिला अदालत में याचिका दाखिल की गई है।याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिए गए कुछ बयानों से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। अदालत ने पुलिस को मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है।