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Kharge voices his anguish over the 'purification' controversy... says he did not receive the expected support from party leaders.
नई दिल्ली। उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कार्यक्रम स्थल पर कथित शुद्धिकरण कराए जाने के मामले ने कांग्रेस के भीतर भी चर्चा तेज कर दी है। अब खुद खरगे ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अपनी ही पार्टी के नेताओं से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से जातिगत भेदभाव और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों पर ज्यादा मजबूती के साथ आवाज उठाने की अपील की।
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके संबोधन के बाद कार्यक्रम स्थल पर शुद्धिकरण जैसा आयोजन किया गया, लेकिन पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर वैसा समर्थन नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।खरगे ने इस घटना को सामाजिक भेदभाव से जोड़ते हुए कांग्रेस नेताओं से ऐसे मामलों में अधिक आक्रामक रुख अपनाने को कहा। उन्होंने उत्तराखंड कांग्रेस की सराहना भी की, जिसने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए भाजपा और संघ पर निशाना साधा।
खरगे ने भाजपा पर धार्मिक मूल्यों की चयनात्मक व्याख्या करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद उसी स्थान का शुद्धिकरण कराया जाता है तो इसे किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी को सामाजिक न्याय और जाति आधारित भेदभाव के मुद्दों पर अपनी आवाज और मजबूती से उठानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से ऐसे मामलों में खुलकर सामने आने का आग्रह किया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस कार्य समिति ने हल्द्वानी में कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया।वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह आयोजन भाजपा और संघ से जुड़े लोगों की ओर से किया गया था। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से इस मामले पर माफी मांगने की मांग भी की है।
कांग्रेस की ओर से इस मामले को केवल खरगे के अपमान तक सीमित रखने के बजाय इसे जातिगत भेदभाव और सामाजिक समानता से जोड़कर उठाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर भेदभाव का सवाल गंभीर है और ऐसे मामलों पर राजनीतिक दलों को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।