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Khelo India Tribal Games: From the stove to the stage, Pallavi Payeng's determination earned her a silver medal.
रायपुर। रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में असम की भारोत्तोलक पल्लवी पाएंग ने महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर खास पहचान बनाई। यह जीत केवल मेडल तक सीमित नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और परिवार के साथ की प्रेरक कहानी भी है।
मां की जिम्मेदारी और सपनों के बीच कठिन फैसला
मिसिंग जनजाति से आने वाली पल्लवी के सामने सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनकी बेटी केवल छह महीने की थी। एक ओर मातृत्व की जिम्मेदारी थी, तो दूसरी ओर खेल में लौटने का सपना। उन्होंने भारी मन से ट्रेनिंग का रास्ता चुना और अपनी बच्ची को मां के भरोसे छोड़कर अभ्यास में जुट गईं।
चार साल की मेहनत ने दिया फल
लगातार मेहनत, अनुशासन और त्याग का परिणाम अब सामने है। चार साल बाद उनकी कड़ी तपस्या ने उन्हें रजत पदक तक पहुंचाया और रायपुर में उनकी सफलता की गूंज सुनाई दी।
पति का साथ बना सबसे बड़ी ताकत
पल्लवी के पति सुखावन बीएसएफ में तैनात हैं और खुद भी पूर्व मुक्केबाज रह चुके हैं। उन्होंने पल्लवी के सपनों को कभी पीछे नहीं हटने दिया। घर से दूर रहते हुए भी उन्होंने मानसिक रूप से हमेशा उनका साथ निभाया।
परिवार ने संभाली जिम्मेदारी
पल्लवी बताती हैं कि मां बनने के बाद फिटनेस दोबारा हासिल करना आसान नहीं था, लेकिन पति और मां ने घर की जिम्मेदारी संभाल ली, जिससे वह पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान दे सकीं।
वापसी आसान नहीं थी, लेकिन हौसला मजबूत रहा
साल 2023 में स्टेट चैंपियनशिप में छठे स्थान पर रहने के बाद पल्लवी के लिए वापसी की राह कठिन हो गई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अभ्यास जारी रखा।
फिर हासिल की जीत की लय
उनकी मेहनत रंग लाई और 2025 में तेजपुर स्टेट चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। इसके बाद अस्मिता लीग में स्वर्ण पदक हासिल कर उन्होंने खुद को फिर साबित किया।
नई प्रेरणा बनी पल्लवी की कहानी
पल्लवी पाएंग की यह सफलता उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से गुजरती हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो, तो किसी भी परिस्थिति में लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।