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दुर्ग। देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने और नौनिहालों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रविवार 28 जून से दुर्ग जिले में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान के पहले दिन जिलेभर में स्थापित पोलियो बूथों पर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी वैक्सीन की दो बूंद पिलाई गई। आगामी 29 और 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक देंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके।

इस वर्ष अभियान के तहत जिले के 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 2 लाख 57 हजार 134 बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान की शुरुआत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज दानी ने बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर की।
1029 पोलियो बूथ, मोबाइल और ट्रांजिट टीमें भी तैनात

स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को सफल बनाने के लिए जिलेभर में 1029 पोलियो बूथ, 25 ट्रांजिट टीम, 25 मोबाइल टीम तथा 13 मेला एवं बाजार स्थल टीमों की तैनाती की है। ये टीमें बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ईंट भट्ठों, औद्योगिक क्षेत्रों, मेला एवं बाजार स्थलों, मलीन बस्तियों और दूरस्थ इलाकों में जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगी ताकि कोई भी बच्चा इस अभियान से वंचित न रहे।

अभियान के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, खंड चिकित्सा अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आवश्यक वैक्सीन, पोस्टर, बैनर और अन्य सामग्री भी सभी विकासखंडों में उपलब्ध करा दी गई है।
सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने क्या कहा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी ने बताया कि, “28 जून को जिले के विभिन्न बूथों पर 0 से 5 वर्ष के बच्चों को पल्स पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। इसके अलावा 29 और 30 जून को जो बच्चे छूट जाएंगे, उन्हें घर-घर जाकर पोलियो की डोज दी जाएगी। पूरे जिले में लगभग ढाई लाख बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए लगभग 1029 बूथ बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त हमारी मोबाइल टीमें रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, ईंट भट्ठों और दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर भी बच्चों को पोलियो की दवा पिलाएंगी। हमारा उद्देश्य है कि लक्षित आयु वर्ग का कोई भी बच्चा पोलियो की इस जीवनरक्षक खुराक से वंचित न रहे।”

उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को निर्धारित तिथि पर नजदीकी पोलियो बूथ तक अवश्य लेकर आएं और इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। साथ ही आसपास के परिवारों को भी जागरूक करें, ताकि जिले का प्रत्येक बच्चा पोलियो से सुरक्षित रह सके।
अभिभावकों ने भी की लोगों से अपील
पल्स पोलियो अभियान के तहत अपनी चार वर्षीय बेटी तृषा साहू को पोलियो की दवा पिलाने पहुंचे हिमांशु साहू ने कहा, “मैं बोरसी का रहने वाला हूं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे पल्स पोलियो अभियान के तहत अपनी चार साल की बेटी को पोलियो की दो बूंद पिलाने लाया हूं। मैं सभी अभिभावकों से अपील करता हूं कि वे भी अपने बच्चों को जरूर लेकर आएं और पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलवाएं।”

भारत पोलियो मुक्त, फिर भी सतर्कता जरूरी
गौरतलब है कि भारत वर्ष 2011 से वाइल्ड पोलियो वायरस से पूरी तरह मुक्त घोषित हो चुका है। हालांकि दुनिया के कुछ देशों में अब भी पोलियो वायरस का संक्रमण मौजूद है। ऐसे में भारत में इस वायरस की दोबारा एंट्री रोकने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पल्स पोलियो अभियान संचालित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित टीकाकरण के बावजूद हर राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में बच्चों को अतिरिक्त खुराक देना बेहद आवश्यक है, ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत हो सके।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान का लक्ष्य केवल पोलियो की दवा पिलाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जिले का कोई भी बच्चा इस महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।