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Love marriage sparks controversy; lawyer couple fined ₹35,000 but remains ostracized by the community.
राजनांदगांव। अंतरजातीय विवाह करने वाले एक एडवोकेट दंपती ने कथित सामाजिक बहिष्कार, जुर्माना वसूली और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए खैरागढ़ पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। ग्राम देवरी निवासी अधिवक्ता नेमीचंद वर्मा ने एसपी कार्यालय में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि सितंबर 2025 में अपनी इच्छा से प्रमिला सोनकर से अंतरजातीय विवाह करने के बाद समाज के कुछ लोगों ने उन्हें और उनकी पत्नी को समाज से बाहर कर दिया।
शिकायत के अनुसार, विवाह के बाद समाज की बैठक में दंपती पर 35 हजार रुपये का कथित जुर्माना लगाया गया। सामाजिक दबाव के चलते परिवार ने यह राशि जमा कर दी। इसके बाद समाज की ओर से पूरे समाज के लिए सामूहिक भोज कराने और आराध्य वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना करने की शर्त भी रखी गई। दंपती का कहना है कि इन सभी शर्तों का पालन करने के बावजूद उन्हें आज तक समाज में दोबारा शामिल नहीं किया गया।
नेमीचंद वर्मा का आरोप है कि जुर्माना लेने के बाद उनके परिवार के अन्य सदस्यों को समाज में स्वीकार कर लिया गया, लेकिन उन्हें और उनकी पत्नी को अब भी सामाजिक कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि समाज के लोगों को उनसे किसी प्रकार का संबंध नहीं रखने, उनके घर नहीं जाने तथा विवाह, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में आमंत्रित नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
दंपती ने आरोप लगाया है कि लगातार सामाजिक बहिष्कार के कारण उन्हें मानसिक प्रताड़ना, सामाजिक अपमान और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार पर आघात का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यह समानता और गरिमा के संवैधानिक अधिकार का भी उल्लंघन है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने गांव के प्रमुख लोगों से भी मदद मांगी थी। इस दौरान उन्हें जानकारी मिली कि गांव में पहले भी कई लोगों को कथित सामाजिक बहिष्कार और जुर्माना वसूली जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। शिकायत में दावा किया गया है कि ऐसे मामलों की जानकारी पहले भी पुलिस तक पहुंची थी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से इस तरह की प्रथाओं को बढ़ावा मिला।
नेमीचंद वर्मा ने दावा किया है कि उनके पास एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें समाज के एक सदस्य के साथ हुई बातचीत में कथित जुर्माना, सामाजिक बहिष्कार और 35 हजार रुपये लेने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर यह रिकॉर्डिंग जांच के लिए पुलिस को उपलब्ध कराई जाएगी।
एडवोकेट दंपती ने पुलिस अधीक्षक से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने, ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराने, कथित रूप से वसूले गए 35 हजार रुपये वापस दिलाने तथा समाज के नाम पर चल रही ऐसी प्रथाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए मामले की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।