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Lucknow Fire Tragedy: Demolition ordered in 2016; the system woke up only after 15 deaths; SIT probe to uncover layers of negligence.
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद दर्ज एफआईआर और शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिस इमारत में आग लगी, वहां आग से बचाव के जरूरी इंतजाम तक नहीं थे। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है और सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी।
जांच में सामने आया कि संबंधित भवन को वर्ष 2014 में केवल आवासीय उपयोग की अनुमति मिली थी। इसके बावजूद वहां पेट शॉप, क्लिनिक, गेमिंग जोन, एनीमेशन सेंटर और आईटी ऑफिस संचालित किए जा रहे थे। अवैध निर्माण मिलने पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने 10 मई 2016 को इमारत को गिराने का आदेश जारी किया था, लेकिन दो महीने बाद यह आदेश वापस ले लिया गया। अब 15 लोगों की मौत के बाद दोबारा भवन ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया गया है।
एफआईआर के अनुसार पूरी इमारत में आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था। न तो इमरजेंसी एग्जिट बनाया गया था और न ही धुआं बाहर निकालने की कोई व्यवस्था थी। बिजली की वायरिंग और उपकरण भी सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं थे। हालात इतने गंभीर थे कि राहत एवं बचाव दल को अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए दीवारें काटनी पड़ीं।
घटना के बाद भवन मालिक सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं बिजली विभाग, फायर विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। फॉरेंसिक टीम आग लगने के कारणों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।
इस हादसे ने कई परिवारों के सपने भी छीन लिए। निलेश कुमार और अनामिका सामंत की शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। दोनों परिवार विवाह की अगली रस्मों की योजना बना रहे थे, लेकिन आग की घटना में दोनों की मौत हो गई। जिन घरों में शहनाई बजनी थी, वहां अब अंतिम संस्कार हुआ।
हादसे में 23 वर्षीय भविष्य शर्मा की भी जान चली गई। महज 17 दिन पहले उसे नई नौकरी मिली थी। आग लगने के दौरान उसने अपनी मां को वीडियो कॉल कर बताया कि चारों तरफ धुआं फैल गया है और शायद वह बच नहीं पाएगा। कुछ ही क्षण बाद कॉल कट गई और परिवार की उम्मीदें भी खत्म हो गईं।
कानपुर के रहने वाले संयम विज और सूरजभान सिंह, जो एक एनीमेशन स्टूडियो में साथ काम करते थे, इस हादसे का शिकार हो गए। दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। संयोग यह भी रहा कि घटना वाले दिन संयम की दादी की तेरहवीं थी।
हादसे के बाद निलंबित फायर सेफ्टी ऑफिसर कमलेंद्र कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई को अनुचित बताया है। उनका कहना है कि फायर एनओसी जारी करने की जिम्मेदारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) की होती है, जबकि उनकी भूमिका केवल निरीक्षण और रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक सीमित थी। उन्होंने सीएफओ के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।