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Hearing in High Court on Mamata's election petition: Judge states- 'My brother is a BJP spokesperson; the hearing will be impartial.'
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को लेकर नया कानूनी विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अपनी हार को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। याचिका में मतदाता सूची, मतगणना प्रक्रिया और निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
मंगलवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गौरांग कांत ने पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से अदालत को बताया कि उनके बड़े भाई भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। उन्होंने कहा कि इस तथ्य को सार्वजनिक करने के बाद भी वह निष्पक्षता और न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप मामले की सुनवाई करेंगे, ताकि भविष्य में किसी पक्ष को कोई आपत्ति न रहे।
इस पर ममता बनर्जी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और न्यायमूर्ति की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है।
सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मतगणना केंद्र के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को भवानीपुर के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित मतगणना केंद्र के चार मई के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मतगणना हॉल के अंदर और बाहर की रिकॉर्डिंग न तो हटाई जाएगी और न ही उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ की जाएगी।
इसके साथ ही भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों में इस्तेमाल की गई ईवीएम, कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट मशीनों को भी सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। अदालत ने कहा कि इन मशीनों को बिना न्यायालय की अनुमति के न खोला जाएगा, न स्थानांतरित किया जाएगा और न ही किसी अन्य चुनाव में उपयोग किया जाएगा। मामले के अंतिम निर्णय तक इन्हें जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी में रखा जाएगा।
ममता बनर्जी ने अपनी चुनाव याचिका में आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम अवैध रूप से मतदाता सूची से हटाए गए। इसके अलावा मतगणना में गड़बड़ी और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का भी दावा किया गया है। याचिका में निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति को लेकर हितों के टकराव का मुद्दा भी उठाया गया है।
अदालत में तृणमूल की ओर से कहा गया कि मतगणना के पहले 12 राउंड तक ममता बनर्जी 7,184 वोटों से आगे चल रही थीं, लेकिन इसके बाद अचानक स्थिति बदल गई और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को बढ़त मिल गई। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि मतगणना एजेंटों को मतगणना हॉल से बाहर रखा गया, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।
तृणमूल कांग्रेस ने रिटर्निंग अधिकारी की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि भवानीपुर चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी ने वर्ष 2021 के नंदीग्राम विधानसभा चुनाव में भी यही जिम्मेदारी निभाई थी, जहां ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि चुनाव के बाद कुछ संबंधित अधिकारियों को राज्य सरकार में महत्वपूर्ण पद दिए गए, जिससे निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।
हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को भी चार सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करना होगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 सप्ताह बाद निर्धारित की है।