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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान के साथ संभावित युद्ध को लेकर अपने ही देश में एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी सीनेट में ईरान युद्ध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास हो गया है, जिसके बाद अब ट्रम्प प्रशासन के लिए इस युद्ध को आगे बढ़ाना बेहद मुश्किल हो गया है।
दिलचस्प बात यह है कि इस ऐतिहासिक वोटिंग में राष्ट्रपति ट्रम्प की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसदों ने उनके खिलाफ जाकर वोट किया। बता दें कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में यह जंग विरोधी प्रस्ताव पहले ही पास हो चुका था, और अब सीनेट की मुहर के बाद ट्रम्प पूरी तरह घिर गए हैं।
अमेरिकी सीनेट में इस प्रस्ताव पर कड़ी बहस के बाद वोटिंग हुई। प्रस्ताव के पक्ष में 50 वोट पड़े, जबकि विरोध में 48 वोट आए। अपनी ही पार्टी के सांसदों की बगावत के कारण ट्रम्प यह बेहद जरूरी वोटिंग हार गए। अमेरिकी इतिहास में 53 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राष्ट्रपति को इस तरह संसद में हार का सामना करना पड़ा है।
इस प्रस्ताव के पास होने के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। प्रस्ताव पास होने का सबसे बड़ा असर यह होगा कि ट्रम्प को ईरान जंग के लिए मांगे गए साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये का फंड नहीं मिल पाएगा। ट्रम्प प्रशासन ने संसद से इस युद्ध को जारी रखने के लिए भारी-भरकम बजट की मांग की थी। अपनी ही पार्टी के सांसदों के विरोध के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ते दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस आंतरिक विरोध का सीधा असर नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों पर पड़ सकता है।
इस प्रस्ताव के बाद भी एक कानूनी रास्ता बचा है, लेकिन वह आसान नहीं होगा। अमेरिकी सुरक्षा कानून के तहत राष्ट्रपति ट्रम्प अभी भी ईरान के खिलाफ जंग छेड़ सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें जरूरी फंड आम बजट या रक्षा बजट से निकालना होगा, जिसके लिए उन्हें दोबारा अमेरिकी संसद (Congress) से मंजूरी लेनी होगी, जो मौजूदा परिस्थितियों में बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।