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MP News: Patwari caught red-handed taking bribe in Bhind, was demanding bribe in exchange for demarcation
भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने यह कार्रवाई मालनपुर क्षेत्र में कैडबरी फैक्ट्री के पास की, जहां आरोपी पटवारी किसान से जमीन के सीमांकन के बदले रिश्वत ले रहा था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान पटवारी हिमांशु तोमर के रूप में हुई है। लोकायुक्त पुलिस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
पैतृक जमीन के सीमांकन के लिए मांगी थी रिश्वत
जानकारी के अनुसार, मालनपुर क्षेत्र के तुकेंडा गांव निवासी किसान रामवीर सिंह चौहान अपनी पैतृक जमीन का सीमांकन करवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सभी आवश्यक सरकारी प्रक्रियाएं पूरी कर आवेदन भी दिया था। आरोप है कि संबंधित हल्का पटवारी हिमांशु तोमर ने काम करने के बदले रिश्वत की मांग की।
बताया जा रहा है कि पटवारी ने शुरुआत में 10 हजार रुपये मांगे थे। काफी बातचीत के बाद वह 8 हजार रुपये लेने पर राजी हुआ। किसान रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था, इसलिए उसने सीधे ग्वालियर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का सत्यापन किया। किसान और पटवारी के बीच हुई बातचीत की जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर टीम ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।
तय रणनीति के तहत बुधवार को किसान को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 6 हजार रुपये लेकर मालनपुर स्थित कैडबरी फैक्ट्री के पास भेजा गया। लोकायुक्त टीम पहले से सादे कपड़ों में आसपास मौजूद थी।
केमिकल लगे नोटों से हुआ खुलासा
लोकायुक्त पुलिस ने किसान को विशेष केमिकल लगे नोट दिए थे। जैसे ही पटवारी हिमांशु तोमर ने पैसे हाथ में लिए, टीम ने उसे मौके पर पकड़ लिया। बाद में उसके हाथ धुलवाए गए तो पानी का रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
टीम ने आरोपी के पास से रिश्वत की रकम बरामद कर ली और उसे हिरासत में लेकर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी।
जमीन संबंधी मामलों में बढ़ रही शिकायतें
प्रदेश में सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे जैसे राजस्व मामलों में रिश्वतखोरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बावजूद मैदानी स्तर पर भ्रष्टाचार की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। ऐसे मामलों में आम लोगों की जागरूकता और सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।