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Major outcome of PM Modi's New Zealand visit: 18 agreements sealed; trade to double by 2030.
नई दिल्ली। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की आधिकारिक यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देशों ने अपने संबंधों को आधिकारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने की घोषणा की। बैठक के दौरान 8 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए और 10 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
बैठक में दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर करीब ₹35 हजार करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। इसके साथ ही "इंडिया-न्यूजीलैंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: रोडमैप 2030" को मंजूरी दी गई, जो अगले चार वर्षों में दोनों देशों के सहयोग की दिशा तय करेगा।
वार्ता का प्रमुख केंद्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना रहा। क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक हालात और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और साझा हितों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड की आधिकारिक यात्रा की थी। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐतिहासिक मानी जा रही है। ऑकलैंड पहुंचने पर प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में विस्तृत चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद आर्थिक सहयोग को नई गति मिली है। न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक निवेश करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के युवाओं के बीच स्टार्टअप, नवाचार और बिजनेस कल्चर को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
न्यूजीलैंड ने भारत के 'विकसित भारत 2047' विजन को समर्थन देने का भरोसा जताया। दोनों नेताओं ने कहा कि नई रणनीतिक साझेदारी केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षा, कृषि, प्रौद्योगिकी, रक्षा, नवाचार, जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग को नई दिशा देगी।