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Major relief for MSME entrepreneurs... Amendment bill to curb payment delays approved by Parliament.
नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए राहत लेकर आया एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 अब संसद से पारित हो गया है। लोकसभा ने शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के बीच बिना चर्चा के विधेयक को मंजूरी दे दी। इससे पहले 3 अगस्त को राज्यसभा भी इस पर अपनी स्वीकृति दे चुकी थी।
संशोधित कानून का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम कारोबारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। लंबे समय से एमएसएमई क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती भुगतान में होने वाली देरी रही है, जिससे कारोबार की नकदी व्यवस्था प्रभावित होती है।नए प्रावधानों के तहत ऐसे विवादों के त्वरित समाधान के लिए समय-सीमा तय की गई है। साथ ही समझौते के जरिए भुगतान की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बनाया गया है, ताकि उद्यमियों को लंबे समय तक अपनी राशि का इंतजार न करना पड़े।
विधेयक में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी जोड़ा गया है कि यदि किसी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहती है, तो अदालत एमएसएमई आपूर्तिकर्ता को निर्धारित राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान कराने का आदेश दे सकेगी। इससे छोटे कारोबारों पर वित्तीय दबाव कम होने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि संशोधन के जरिए केवल भुगतान व्यवस्था ही नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाया जाएगा। इससे विवादों का निपटारा तेजी से होगा और कारोबारियों का भरोसा भी मजबूत होगा।
एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान बताया था कि इस क्षेत्र को मिलने वाला बकाया ऋण वर्ष 2014-15 के लगभग 10 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर अब 38.35 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। यह इस क्षेत्र में बढ़ते वित्तीय सहयोग का संकेत है।उन्होंने बताया कि देश की सकल घरेलू उत्पाद में एमएसएमई क्षेत्र की लगभग 31 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा विनिर्माण क्षेत्र में इसकी भागीदारी 36 प्रतिशत और कुल निर्यात में करीब 41 प्रतिशत योगदान है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र की मजबूत भूमिका को दर्शाता है।