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Major scam in Keshkal bypass: Trees were left where the road was supposed to be built, and more than 8,000 trees were cut where it wasn't supposed to be.
कांकेर। धमतरी से जगदलपुर तक प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के चौड़ीकरण कार्य में सामने आया यह मामला अब गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर रहा है। केशकाल बाईपास परियोजना में जहां सड़क बननी थी, वहां पेड़ आज भी खड़े हैं, जबकि दूसरी जगह बड़े पैमाने पर कटाई कर दी गई।
8,159 पेड़ कटे गलत जगह, असली साइट अब भी हरी-भरी
रिपोर्ट के अनुसार करीब 8,159 पेड़ों की कटाई उस क्षेत्र में कर दी गई जहां सड़क का एलाइनमेंट ही नहीं था। वहीं वास्तविक निर्माण स्थल पर अब भी 6,336 पेड़ मौजूद हैं, जिन्हें काटने के लिए अब दोबारा अनुमति मांगी जा रही है।
2.75 करोड़ वसूले गए, लेकिन काम गलत दिशा में चलता रहा
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग ने पेड़ों की कटाई के बदले लगभग 2.75 करोड़ रुपये की राशि भी वसूल कर ली, लेकिन वास्तविक स्थल पर कटाई ही नहीं हुई। यह स्थिति निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
लापरवाही या सिस्टम फेलियर, जांच के आदेश से हड़कंप
जैसे ही मामला सामने आया, शासन स्तर पर जांच के आदेश जारी कर दिए गए। इसके बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और सभी दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है।
नई एजेंसी ने खोली पोल, काम तुरंत रोका गया
जब दुर्ग की निर्माण एजेंसी आलोक बिल्टेक प्राइवेट लिमिटेड ने बाईपास निर्माण की तैयारी शुरू की, तब मौके पर जाकर यह गड़बड़ी सामने आई। निरीक्षण में पाया गया कि स्वीकृत एलाइनमेंट पर पेड़ मौजूद हैं, जिससे पूरा मामला उजागर हो गया।
काम रुका, अब वन विभाग से नए क्लियरेंस का इंतजार
राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया है। अब वन विभाग से सही एलाइनमेंट और अनुमति की पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
अधिकारियों का बयान, मामला पुराना लेकिन जांच जारी
वन विभाग का कहना है कि यह मामला पहले की प्रक्रिया से जुड़ा है और सभी तथ्यों को संकलित किया जा रहा है। वहीं विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार प्राधिकृत राशि वसूली जा चुकी है।
सवाल बड़ा है, जिम्मेदारी किसकी तय होगी
यह पूरा मामला केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि सिस्टम की गंभीर चूक माना जा रहा है, जहां गलत जगह पेड़ कटते रहे और सही जगह काम ही शुरू नहीं हो सका। अब नजर जांच रिपोर्ट पर है कि आखिर इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी किसकी तय होती है।