

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Mamata faction gets a new name and a football player symbol.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अंदरूनी विवाद अब चुनावी पहचान तक पहुंच गया है। पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं। साथ ही, आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया है।
चुनाव आयोग के फैसले के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।
ममता के नए चुनाव चिन्ह में क्या है?
ममता बनर्जी के गुट को मिला नया चुनाव चिन्ह फुटबॉल खिलाड़ी है। इसमें एक खिलाड़ी को फुटबॉल पर किक मारते हुए दिखाया गया है। चिन्ह के बैकग्राउंड में तिरंगे की डिजाइन भी दिखाई देती है और ऊपर पार्टी का नाम लिखा है।
यह चुनाव चिन्ह ममता बनर्जी के फुटबॉल से जुड़ाव के कारण भी चर्चा में है। मार्च 2025 में अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेस्सी की साइन की हुई जर्सी मिलने के बाद ममता ने फुटबॉल के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया था।
तीन नाम और तीन चिन्ह के विकल्प मांगे गए थे
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से तीन-तीन पार्टी नाम और तीन-तीन चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा था। इसके बाद दोनों पक्षों ने अपनी पसंद आयोग को भेजी।
ममता गुट की ओर से फुटबॉल के अलावा प्रार्थना और क्रिकेट बैट जैसे विकल्प भी दिए गए थे। क्रिकेट बैट के साथ ‘खेला होबे’ स्लोगन का विकल्प भी रखा गया था।
आयोग ने उपलब्ध विकल्पों में से ममता गुट को फुटबॉल खिलाड़ी और दूसरे गुट को लिफाफा चिन्ह आवंटित किया।
अभी अंतिम फैसला नहीं
चुनाव आयोग की यह व्यवस्था अंतरिम है और आगामी उपचुनावों के लिए लागू होगी। दोनों गुट फिलहाल मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। मूल नाम और चिन्ह पर अंतिम फैसला पार्टी पर नियंत्रण को लेकर चल रही कार्यवाही के बाद होगा।
दोनों गुट आगामी 6 अक्टूबर के उपचुनावों में अपनी नई पहचान के साथ मैदान में उतरेंगे।
ममता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
चुनाव आयोग के इस फैसले को ममता बनर्जी ने चुनौती दी है। उन्होंने आयोग द्वारा TMC के मूल नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है।
ममता ने आयोग के फैसले पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक इतिहास का ‘काला दिन’ बताया है। उन्होंने कहा है कि वह पार्टी की मूल पहचान और ‘फूल-घास’ चिन्ह को वापस पाने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई जारी रखेंगी।
यानी फिलहाल बंगाल की राजनीति में एक ही सवाल बड़ा हो गया है—क्या ममता बनर्जी की पार्टी दो अलग-अलग चुनावी पहचान के साथ आगे बढ़ेगी, या अदालत और चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई के बाद फिर से पुराना नाम और ‘फूल-घास’ का चिन्ह वापस आएगा?