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Mass marriage of 6414 couples in a single day under CM Kanya Vivah Yojana
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर आज सामाजिक समरसता, सर्वधर्म सद्भाव और संवेदनशील शासन के एक ऐतिहासिक उदाहरण की साक्षी बनी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एक ही दिन में 6,414 जोड़े वैवाहिक जीवन में बंधे। इस अभूतपूर्व आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया, जिससे छत्तीसगढ़ को एक और गौरवशाली उपलब्धि मिली।

मुख्यमंत्री साय ने रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान से आयोजन का उद्घाटन किया और यहां 1,316 जोड़ों को प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद दिया। बाकी जोड़े वर्चुअल माध्यम से जुड़े, जिससे यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में एक साथ संपन्न हुआ। इतने बड़े पैमाने पर एक ही दिन में विवाह आयोजन ने इसे विश्व रिकॉर्ड बना दिया।
यह कार्यक्रम केवल विवाह का आयोजन नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता का उत्सव भी साबित हुआ। इसमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के जोड़ों ने अपने-अपने रीति-रिवाजों से विवाह किया और छत्तीसगढ़ की गंगा-जमुनी तहज़ीब को जीवंत किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुस्लिम समाज की 3 जोड़ी, ईसाई समाज की 113 जोड़ी, बौद्ध समाज की 5 जोड़ी, पीवीटीजी समुदाय की 10 जोड़ी, और यहां तक कि सरेंडर किए हुए नक्सलियों की चार बेटियों की शादी भी इस कार्यक्रम में शामिल रही।
सभी नवविवाहित जोड़ों को 35,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बेटी का विवाह गरीब परिवारों के लिए चिंता का विषय होता था, लेकिन यह योजना इसे सम्मान और भरोसे में बदल रही है।
साथ ही, मुख्यमंत्री साय ने मंच से कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह अभियान सरगुजा और बस्तर संभाग के 8 जिलों में शुरू किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन और समाज की साझेदारी से ही स्वस्थ छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शुरू की थी, जिसे मुख्यमंत्री साय नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि एक ही दिन में हजारों विवाह मुख्यमंत्री की संवेदनशील और सर्वसमावेशी सोच का प्रमाण हैं। कार्यक्रम में कई विधायक और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ का यह ऐतिहासिक दिन राज्य में सामाजिक समरसता और संवेदनशील शासन का प्रतीक बन गया है।