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Meta fined a substantial amount; 3,000 crore rupees for negligence in child safety.
वॉशिंगटन। सोशल मीडिया दिग्गज Meta को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में बड़ा झटका लगा है। जूरी ने कंपनी को दोषी ठहराते हुए लगभग 375 मिलियन डॉलर (करीब 3,000 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना लगाया है।
बच्चों के जोखिम छिपाने का आरोप
जूरी ने अपने फैसले में कहा कि Meta को अपने प्लेटफॉर्म्स Instagram, Facebook और WhatsApp पर बच्चों से जुड़े खतरों की जानकारी थी, लेकिन कंपनी ने इसे छिपाया। साथ ही यह भी पाया गया कि कंपनी ने बच्चों के यौन शोषण के जोखिम और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भ्रामक जानकारी दी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
चीफ जज ब्रायन बिडशाइड ने फैसला सुनाते हुए कहा कि Meta ने अनुचित और भ्रामक व्यापारिक तरीकों का इस्तेमाल किया और बच्चों की कमजोरियों का फायदा उठाया। जूरी ने माना कि कंपनी ने यह काम जानबूझकर किया।
हजारों उल्लंघनों पर जुर्माना
जूरी ने Meta के खिलाफ 37,500 उल्लंघनों को सही ठहराया। प्रत्येक उल्लंघन पर 5,000 डॉलर का जुर्माना लगाया गया, जिससे कुल पेनल्टी 375 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।
आगे और बढ़ सकता है मामला
इसी तरह का एक और मामला कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में भी लंबित है, जहां Meta और YouTube की जिम्मेदारी तय की जानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला टेक कंपनियों के लिए बड़ा संकेत है कि बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज करना अब भारी पड़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर सख्ती बढ़ी
सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर कई देश सख्त कदम उठा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Instagram जैसे प्लेटफॉर्म के उपयोग पर रोक लगा दी है। वहीं जर्मनी ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर कड़े नियम लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।