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West Asia Crisis: Iran-Israel Conflict and India's Strategy
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ बातचीत के दावों के बावजूद पश्चिम एशिया का संकट मंगलवार को बढ़ गया। इजरायल ने रातभर ईरान के 50 से अधिक सैन्य ठिकानों और उत्पादन केंद्रों पर बमबारी की, जबकि लेबनान के दक्षिण में भी हमले हुए। इसके अलावा, ट्रंप के पांच दिनों तक ऊर्जा केंद्रों पर हमले न करने के आदेश के बावजूद ईरान के दो गैस ठिकानों को निशाना बनाया गया।
मिसाइल और ड्रोन हमले
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में तेल अवीव में 100 किलो विस्फोटक वाली मिसाइल दागी। इराक के कुर्दिस्तान में छह मिसाइल हमलों में छह लड़ाके मारे गए और 30 घायल हुए। इन हमलों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़कर 101.77 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
भारत और अमेरिका की रणनीति
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित रखने पर जोर दिया। मोदी ने कहा कि भारत शांति और स्थिरता के प्रयासों का समर्थन करता है और वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित न होने देने के लिए तत्पर है।
वैश्विक प्रभाव और आपूर्ति सुरक्षा
भारत ने स्पष्ट किया कि कोई भी पक्ष होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद न करे। ईरान का अड़ियल रुख और हमलों की स्थिति के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ रहा है।
इस संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच, भारत और अमेरिका दोनों सक्रिय रूप से शांति बहाली और जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास में लगे हैं।