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Millets carts are changing the image of women, earning thousands daily
रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई पहल तेजी से असर दिखा रही है। लक्ष्मी सखी मिलेट्स कार्ट योजना के जरिए अब महिलाएं न केवल खुद का रोजगार खड़ा कर रही हैं, बल्कि हर दिन अच्छी कमाई भी कर रही हैं।
रोजाना 2 से 3 हजार की आमदनी, गांव की महिलाओं की नई पहचान
इस योजना के तहत जुड़े स्व सहायता समूहों की महिलाएं मिलेट्स आधारित उत्पाद बेचकर रोजाना 2 से 3 हजार रुपये तक कमा रही हैं। महीने के स्तर पर यह आय 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच रही है। खासतौर पर कांकेर जिले के नरहरपुर क्षेत्र की महिलाएं इस मॉडल से सफलता की नई कहानी लिख रही हैं।
राज्य स्तर पर मिला बढ़ावा, महिलाओं को सौंपे गए कार्ट और सहायता राशि
नया रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने महिलाओं को मिलेट्स कार्ट और आर्थिक सहायता प्रदान की। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को छोटे स्तर पर व्यापार शुरू करने का अवसर देना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
कम ब्याज पर लोन, कारोबार बढ़ाने का सुनहरा मौका
महिला कोष योजना के तहत महिलाओं को बेहद कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
-पहली बार 2 लाख रुपये तक का लोन
-समय पर भुगतान करने पर दूसरी बार 6 लाख रुपये तक की सुविधा
यह आर्थिक सहयोग महिलाओं को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है।
सरकार का लक्ष्य, हर महिला बने आत्मनिर्भर
सरकार का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें लखपति दीदी की श्रेणी में लाना है। इसके लिए अलग अलग योजनाओं के माध्यम से लगातार सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
छोटे व्यवसायों से बड़ी सफलता की ओर कदम
मिलेट्स कार्ट के अलावा महिलाएं पापड़ निर्माण, किराना दुकान और अन्य छोटे व्यवसायों से भी जुड़ रही हैं। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ रही है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।
आर्थिक सशक्तिकरण से समाज में बदलाव
यह पहल साफ संकेत देती है कि जब महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो वे न केवल खुद आगे बढ़ती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।