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Modi government's major decision on rising sugar prices, changes in import rules; hoarding to be curbed
नई दिल्ली। चीनी की बढ़ती कीमतों ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 29 फीसदी तक बढ़कर 48 रुपये से 63 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गए हैं। कीमतों में अचानक आए इस उछाल के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार का उद्देश्य चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है।
केंद्र सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयात होने वाली कच्ची चीनी के नियमों में संशोधन किया है। सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर के TRQ आयात से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया है।
नए नियमों के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को अब तय एक अंतिम तारीख तक बेचने के बजाय प्रत्येक खेप के लिए अलग-अलग समय सीमा लागू होगी। इसके साथ ही आयातित कच्ची चीनी की रिफाइनिंग और बिक्री दो महीने के भीतर करना अनिवार्य कर दिया गया है।
पहले TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक समान अंतिम समय सीमा निर्धारित थी। अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए प्रत्येक आयातित खेप के हिसाब से समय सीमा तय करने का प्रावधान किया है।
सरकार का मानना है कि इससे आयातित चीनी को लंबे समय तक स्टॉक करके रखने की संभावना कम होगी और बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ेगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को देश में चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। एक महीने पहले यही कीमत 48.73 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी करीब एक महीने में चीनी लगभग 29 फीसदी महंगी हुई है।
चीनी का अधिकतम खुदरा मूल्य 75 रुपये प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया गया। वहीं, पिछले 7 से 10 दिनों में ही कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है और कई बाजारों में चीनी 47-48 रुपये से बढ़कर करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के अनुसार, मौसम संबंधी समस्याओं के कारण चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा सट्टेबाजी और जमाखोरी ने भी कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
हालांकि, आगामी त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद होने की बात कही गई है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार उत्पादन में कमी को लेकर सतर्क है। उनके मुताबिक गन्ने की फसल पर अल नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियों का भी असर पड़ा है।
देश में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन बताई गई है। वहीं, भारत के पास 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक मौजूद होने की जानकारी दी गई है। सरकार का कहना है कि मौसम संबंधी परिस्थितियों का असर केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में कृषि उत्पादन पर पड़ा है।
आयात नियमों में बदलाव का मुख्य उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और आयातित कच्ची चीनी की जमाखोरी को रोकना है। दो महीने के भीतर रिफाइनिंग और बिक्री की अनिवार्यता से आयातित स्टॉक के लंबे समय तक पड़े रहने की संभावना कम होगी।