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Mohan Bhagwat's major statement on the Battle of Haldighati; debate reignites over the historical narrative.
उदयपुर। आयोजित राष्ट्र चेतना संकल्प सभा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हल्दीघाटी युद्ध और महाराणा प्रताप को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की विजय हुई थी, लेकिन इतिहास लेखन में इसके विपरीत नैरेटिव तैयार किया गया।
मोहन भागवत ने कहा कि मुगल इतिहासकारों के विवरण में भी यह संकेत मिलता है कि युद्ध के दौरान मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि वास्तविक विजय किसकी हुई थी। उन्होंने कहा कि कई ऐतिहासिक घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
भागवत ने हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े तीन प्रमुख प्रसंगों का उल्लेख किया।
-पहला, प्रारंभिक संघर्ष में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा।
-दूसरा, युद्ध के दौरान महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के अद्भुत पराक्रम का उदाहरण दिया गया।
-तीसरा, युद्ध के बाद मुगल सेना का गोगुंदा क्षेत्र तक सीमित रहना बताया गया।
इन घटनाओं के आधार पर उन्होंने कहा कि वास्तविक बढ़त किस पक्ष को मिली, यह समझा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की जयंती आज भी पूरे सम्मान के साथ मनाई जाती है, जबकि अकबर की जयंती सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती। उनके अनुसार यह इस बात का संकेत है कि समाज की स्मृति में वास्तविक सम्मान किसे मिला है। उन्होंने हल्दीघाटी युद्ध को केवल सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि स्वाभिमान और स्वतंत्रता की लड़ाई बताया।
भागवत ने कहा कि कई बार इतिहासकारों ने घटनाओं को वास्तविकता से अलग तरीके से प्रस्तुत किया है। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम और बाबू कुंवर सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजी इतिहास लेखन में भी तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया।
उन्होंने आगे कहा कि देश की प्रगति को रोकने के लिए देश के भीतर और बाहर झूठी सूचनाएं और नैरेटिव गढ़ने की कोशिशें हो रही हैं। इनके पीछे संगठित और आर्थिक रूप से मजबूत ताकतें भी हो सकती हैं, लेकिन भारत को अपने मूल्यों और सत्य के आधार पर मजबूती से खड़ा रहना होगा।
मोहन भागवत ने कहा कि भारत की प्रगति केवल देश के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के कल्याण के लिए भी जरूरी है। इसलिए देश को आत्मविश्वास और सत्य आधारित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।