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Mohan Bhagwat's statement, said- Hindu society is not in danger from anyone, but needs to be vigilant.
लखनऊ। लखनऊ में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने जनसंख्या, घुसपैठ और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर अहम बयान दिए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को किसी से खतरा नहीं है, लेकिन समाज को सावधान और सजग रहने की जरूरत है।
घुसपैठ रोकने पर दिया जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर दो दिवसीय प्रवास पर पहुंचे भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कार्यक्रम में कहा कि बढ़ती घुसपैठ चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को पहचानकर उन्हें देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए और उन्हें रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए।
जनसंख्या को लेकर भी रखी राय
भागवत ने कहा कि हिंदू समाज के लोगों को कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। उनका कहना था कि जिन समाजों में तीन से कम बच्चे होते हैं, वे धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने विवाह को केवल व्यक्तिगत इच्छा नहीं बल्कि सृष्टि को आगे बढ़ाने का माध्यम बताया।
मतांतरण पर जताई चिंता
कार्यक्रम में भागवत ने लालच या जबरन कराए जा रहे मतांतरण पर रोक लगाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके लिए उचित व्यवस्था और सहयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि समाज में सद्भाव बनाए रखने से भेदभाव समाप्त किया जा सकता है।
सनातन विचारधारा को बताया सद्भाव का आधार
भागवत ने कहा कि सनातन विचारधारा समरसता और सद्भाव की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विरोधियों को समाप्त करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, बल्कि समन्वय और एकता से समाज आगे बढ़ता है।
महिलाओं की भूमिका पर भी दिया संदेश
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में परिवार की नींव मातृशक्ति पर टिकी होती है। महिलाओं को अबला नहीं बल्कि शक्तिशाली बताया और आत्मरक्षा प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को मां के रूप में सम्मान दिया जाता है।
सामाजिक सद्भाव बैठकों पर दिया जोर
भागवत ने समाज में एकता और भाईचारा बढ़ाने के लिए बस्ती स्तर पर सामाजिक सद्भाव से जुड़ी बैठकों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखता है। यह कार्यक्रम विद्या भारती के भारतीय शिक्षा शोध संस्थान, सरस्वती कुंज परिसर में आयोजित किया गया था, जिसमें सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर चर्चा की गई।