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NEET Paper Leak Controversy: Opposition and CJP adamant on Education Minister's resignation; protests continue from Parliament to Jantar Mantar.
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद आंदोलन जारी है। शुक्रवार को संसद परिसर से लेकर जंतर-मंतर तक विरोध प्रदर्शन तेज रहा।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने स्पष्ट कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर धरना समाप्त नहीं होगा। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ होने वाली बैठक किसी न्यूट्रल स्थान पर होगी, लेकिन उनकी पार्टी की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा। दिपके ने सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन से अधिक समय तक चली भूख हड़ताल समाप्त करने पर खुशी जताते हुए कहा कि देश के लिए उनका जीवन बेहद महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में प्रियंका गांधी, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने "वी वांट जस्टिस" और "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" जैसे नारे लगाए।
सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष की मांग बिल्कुल स्पष्ट है और शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि समस्या की जड़ पर कार्रवाई किए बिना समाधान संभव नहीं है। उन्होंने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में भी इसी तरह का गतिरोध देखने को मिला।
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ओम बिरला ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दिलाई। इसके बाद विपक्षी सांसद नीट पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए नारेबाजी करने लगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने की अपील करते हुए कहा कि प्रश्नकाल लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां सरकार से जवाबदेही तय की जाती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद सभी मुद्दों पर नियमों के तहत चर्चा की अनुमति दी जाएगी। हालांकि लगातार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।