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NSPCL's big initiative in steel city Bhilai
भिलाई: एनएसपीसीएल (NSPCL) भिलाई ने अपनी प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत एक बार फिर सामाजिक परिवर्तन की एक नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि की बेटियों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने के उद्देश्य से "बालिका सशक्तिकरण मिशन 2026" (GEM-2026) का शानदार आगाज़ हो चुका है। भिलाई पुरैना स्थित NSPCL परिसर में एक महीने तक चलने वाली इस आवासीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ मुख्य महाप्रबंधक (CGM) व व्यापार प्रमुख (BUH) नील कुमार शर्मा ने पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस वर्ष कार्यशाला में आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की 10 से 13 वर्ष की आयु वर्ग की 80 बालिकाओं को शामिल किया गया है। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है।
04 सप्ताह (एक महीने) तक चलने वाले इस कड़े और सुव्यवस्थित आवासीय प्रशिक्षण में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कार्यशाला के पाठ्यक्रम को इस तरह डिज़ाइन किया गया है जिससे बेटियाँ सीमाओं से परे सपने देखने का हौसला जुटा सकें।
बालिकाओं को अंग्रेजी, गणित, हिंदी, पर्यावरण विज्ञान (EVS) के साथ-साथ कंप्यूटर साइंस और साइबर सिक्योरिटी की शिक्षा दी जाएगी। ड्राइंग, पेंटिंग, शिल्प कार्य (आर्ट एंड क्राफ्ट), नृत्य, नाटक, वाद्य यंत्र और संगीत का विशेष प्रशिक्षण। प्रतिदिन सुबह योग, खेलकूद की गतिविधियाँ आयोजित होंगी। इसके साथ ही, खुद की सुरक्षा के लिए अनिवार्य आत्मरक्षा (Self-Defense/मार्शल आर्ट्स) की तकनीकें सिखाई जाएंगी।
स्वच्छता, प्रभावी संचार (Communication Skills), आपसी संबंध और लिंग विविधता (Gender Diversity) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बालिकाओं को जागरूक किया जाएगा।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी सुरभि त्रिपाठी ने इस भव्य आयोजन की पृष्ठभूमि और व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इसके पीछे महीनों की तैयारी है।
सुरभि त्रिपाठी ने कहा “यह कार्यक्रम आज शुरू हुआ है, लेकिन इसकी तैयारी एक महीने पहले से ही चल रही थी। हम लोगों ने पहले विभिन्न स्कूलों में जाकर टीचर्स को अप्रोच किया, उन्हें समझाया कि इस प्रोग्राम का उद्देश्य क्या है और बच्चों को इससे क्या बेनिफिट मिलेगा। इसके बाद टीचर्स ने बच्चियों का चयन किया। चयन के बाद सभी बच्चियों का संपूर्ण हेल्थ चेकअप (चिकित्सा परीक्षण) कराया गया, ताकि उनकी सेहत से जुड़ी दिक्कतों को पहले ही समझा जा सके।”
उन्होंने आगे बताया कि इस आवासीय कैंप को मुख्य रूप से चार स्तंभों पर केंद्रित किया गया है।
1. पौष्टिक आहार: बच्चियों की डाइट का विशेष ख्याल रखा जाएगा।
2. सेहत व चिकित्सा: कैंप में हर समय डॉक्टर्स और एम्बुलेंस की तैनाती रहेगी।
3. शिक्षा व विधाएं: कंप्यूटर साइंस, साइबर सिक्योरिटी, योग, आर्ट एंड क्राफ्ट और सेल्फ़ डिफ़ेंस जैसी बहुआयामी शिक्षा।
4. कड़ी सुरक्षा: सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे परिसर में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं और कैंप एरिया में किसी भी पुरुष सदस्य (No Male Members) को जाने की अनुमति नहीं है।
इस अवसर पर एनएसपीसीएल भिलाई के व्यापार प्रमुख और मुख्य महाप्रबंधक नील कुमार शर्मा ने बालिकाओं का स्वागत करते हुए अपनी खुशी जाहिर की और एनटीपीसी व इसकी सहयोगी कंपनियों के इस राष्ट्रव्यापी अभियान के बारे में विस्तार से बताया।
नील कुमार शर्मा ने कहा “आज 16 मई को हमने अपने प्रांगण में 80 बालिकाओं का स्वागत किया है। ये हमारे आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की 12 से 13 वर्ष की बच्चियां हैं। इनके लिए हमने 4 सप्ताह का एक रेजिडेंशियल प्रोग्राम (आवासीय कार्यशाला) आयोजित किया है, जिससे इनकी ग्रूमिंग हो सके और ये अपने जीवन के लक्ष्यों व सपनों को बुन सकें। हमारे पास एक पूरी तरह से ट्रेंड एजेंसी है जो इन बच्चियों को शिक्षा, कला, मार्शल आर्ट्स और योग जैसी कई विधाएं सिखाएगी। बच्चियों के रहने के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस एक सुरक्षित हॉस्टल का इंतजाम किया गया है।”
उन्होंने आगे इस अभियान के व्यापक स्तर की जानकारी देते हुए कहा “हम चाहते हैं कि हमारे ग्रामीण क्षेत्र की बच्चियां किसी भी क्षेत्र में पीछे न रहें, क्योंकि हमारे देश का भविष्य हमारी बच्चियां ही हैं। इस बार एनटीपीसी (NTPC) और उसकी सभी संयुक्त उद्यम (JVs) कंपनियों जैसे NSPCL ने मिलकर देश के करीब 45 लोकेशंस पर 10,000 बच्चियों को इस मिशन से जोड़ने का बड़ा संकल्प लिया है। भिलाई में पिछले साल हम करीब 40 बच्चियों को शामिल करते थे, लेकिन इस बार हमने संख्या को दोगुना करते हुए 83 बच्चियों के लिए यह कार्यशाला रखी है। इसी तरह सभी लोकेशंस पर संख्या बढ़ाई गई है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा बेटियों तक पहुँचा जा सके। इस पहल को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भी भारी उत्साह है।”
एनएसपीसीएल भिलाई की यह पहल केवल एक कार्यशाला मात्र नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल की बेटियों को सामाजिक समानता का अधिकार दिलाने और उन्हें मुख्यधारा में लाकर आत्मनिर्भर बनाने का एक महायज्ञ है। एक महीने बाद जब ये बेटियाँ यहाँ से अपने घरों को लौटेंगी, तो उनके पास न केवल आधुनिक ज्ञान होगा, बल्कि समाज में सिर उठाकर जीने का एक नया आत्मविश्वास भी होगा।