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Naxalism has ended, yet over 100 crore rupees are still spent annually on VIP security for politicians.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का प्रभाव खत्म होने के बाद भी बस्तर संभाग में नेताओं को दी जा रही VIP सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा खर्च जारी है। सरपंच, पंचायत सचिव, मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष जैसे पदों से जुड़े 250 से ज्यादा नेताओं की सुरक्षा में 1,000 से अधिक जवान तैनात बताए जा रहे हैं। इन जवानों के वेतन और वाहनों पर सालाना 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।पूरे प्रदेश में करीब 400 नेताओं की सुरक्षा में 1,550 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 500 से अधिक वाहन लगाए गए हैं। इस व्यवस्था पर हर साल करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के बाद छत्तीसगढ़ देश का ऐसा राज्य है, जहां नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं।बस्तर में नक्सली खतरे को देखते हुए पहले कई छोटे पदों पर रहे नेताओं को भी सुरक्षा दी गई थी। अब नक्सलवाद का खतरा कम होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में सुरक्षा की जरूरत और जवानों की तैनाती की समीक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बस्तर क्षेत्र में मंत्री केदार कश्यप, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व सांसद चंदन कश्यप, पूर्व विधायक महेंद्र कर्मा के परिवार के सदस्य और पूर्व मंत्री महेश गागड़ा समेत 10 नेताओं को Z+ सुरक्षा मिली हुई है। इस श्रेणी में 20 से अधिक जवान तैनात रहते हैं।इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को केंद्र की ओर से NSG सुरक्षा मिली है। बस्तर के राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव को Z+ और पूर्व मंत्री गणेश राम भगत को Y+ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है।
सुरक्षा श्रेणी नेताओं की संख्या तैनात जवान
Z+ 10 20 से अधिक
Z 45 10–12
Y+ 50 8–10
Y 40 5–6
X 165 3
X-2 90 2
रिपोर्ट के अनुसार, विधायकों को सामान्य तौर पर X श्रेणी की सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में कुछ विधायकों को इससे ऊंची श्रेणी का सुरक्षा घेरा मिला हुआ है। इनमें अंबिका मरकाम, दलेश्वर साहू और हर्षिता बघेल के नाम शामिल हैं।पूर्व विधायक मंतूराम पवार, पूर्व सांसद मोहन मंडावी, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम और पूर्व सांसद दिनेश कश्यप को भी Y श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई बताई गई है।सांसद बृजमोहन अग्रवाल और संतोष पांडेय को Y श्रेणी, जबकि बस्तर के भोजराज नाग और महेश कश्यप को Z श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने का उल्लेख है।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अलग-अलग पदों पर रहे जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक पदाधिकारियों को उनकी सुरक्षा श्रेणी के अनुसार पुलिसकर्मी उपलब्ध कराए जाते हैं।सांसद और पूर्व सांसद: Y या Z श्रेणी, मंत्री: Y या X श्रेणी ,विधायक: Y या X श्रेणी, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक: X श्रेणी,निगम-मंडल अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष: X श्रेणी
नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद नेताओं की सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या और खर्च की समीक्षा महत्वपूर्ण हो गई है। एक ओर पुलिस बल की जरूरत कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी है, वहीं दूसरी ओर खतरे के आकलन के आधार पर VIP सुरक्षा जारी रखने का तर्क दिया जाता है।ऐसे में सुरक्षा प्राप्त लोगों की मौजूदा खतरे की स्थिति का आकलन, जवानों की तैनाती और सरकारी खर्च की पारदर्शी समीक्षा से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि कहां सुरक्षा जारी रखना जरूरी है और कहां संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।