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New twist in the alleged encounter case of Bharat Bhushan Tiwari; murder case registered against police personnel, including a DSP.
आरा। बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित मुठभेड़ प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। भरत की मां आशा देवी के बयान पर शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी में जगदीशपुर के डीएसपी राजेश कुमार, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य सहयोगी पुलिसकर्मियों को आरोपित बनाया गया है। मंगलवार को भोजपुर के एसपी राज ने प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की।
पुलिस ने इस मामले में हत्या, आर्म्स एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। आशा देवी ने आरोप लगाया है कि उनके पुत्र ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
प्राथमिकी के अनुसार, भरत भूषण तिवारी जवइनिया क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं और मांगों को लगातार प्रशासन के समक्ष उठाते थे। आशा देवी का आरोप है कि 17 जून की सुबह करीब आठ बजे जगदीशपुर डीएसपी और तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और भरत से जवइनिया में रह रहे बाढ़ विस्थापितों की समस्याएं दिखाने के लिए साथ चलने को कहा।
शिकायत के अनुसार, जवइनिया पहुंचने के बाद भरत फेसबुक लाइव के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों की मांगों को सामने रख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अपने पास मौजूद हथियार जमीन पर फेंक दिया और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर गिरा दिया और जगदीशपुर डीएसपी के आदेश पर पांच गोलियां मार दीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
आशा देवी का कहना है कि गोली लगने के बाद पुलिस भरत को अपने वाहन में लेकर चली गई। बाद में शाम को पुलिस की ओर से सूचना दी गई कि उपचार के दौरान उनके पुत्र की मृत्यु हो गई।
गौरतलब है कि 17 जून की सुबह बिलौटी गांव में पुलिस ने दावा किया था कि भरत भूषण तिवारी पुलिस पर फायरिंग कर रहे थे और जवाबी कार्रवाई में घायल हुए थे। बाद में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। अब मां की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के बाद मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।