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Nirav Modi's extradition to India is now near, High Court rejects review petition
नई दिल्ली। भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण अब लगभग सुनिश्चित हो गया है। लंदन हाई कोर्ट ने बुधवार को उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने भारत में प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ अपील की थी। कोर्ट ने भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत आश्वासनों पर भरोसा जताया।
आरोपी और मामला
नीरव मोदी 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में वांछित हैं। वह 19 मार्च 2019 से लंदन की जेल में बंद हैं। उनकी याचिका में मामला फिर से खोलने का अनुरोध किया गया था, लेकिन क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के वकीलों ने सीबीआइ की मदद से इसके खिलाफ ठोस तर्क पेश किए।
कोर्ट का निर्णय
हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका और उससे जुड़ी परिस्थितियां इतनी असाधारण नहीं हैं कि मामले पर पुनर्विचार किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत द्वारा सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच दिए गए कूटनीतिक आश्वासन व्यापक और भरोसेमंद हैं।
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
नीरव मोदी का प्रत्यर्पण फरवरी 2021 में ब्रिटेन के एक जिला न्यायाधीश द्वारा मंजूर किया गया था। इसके बाद यह फाइल ब्रिटेन के विदेश मंत्री को भेजी गई, जिन्होंने अप्रैल 2021 में अंतिम अनुमति दी। मोदी ने इसके खिलाफ लंदन हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसे नवंबर 2022 में खारिज कर दिया गया।
सीबीआइ की भूमिका
सीबीआइ प्रवक्ता ने बताया कि यह पुनर्विचार याचिका अन्य मामलों में आए फैसलों के आधार पर दायर की गई थी। हालांकि, सीबीआइ की निरंतर और समन्वित कार्रवाई के चलते इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया।