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On one hand, the race for admission to medical colleges... on the other, the growing impact of swine flu.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में 27 अगस्त का दिन स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी दो अहम खबरों के कारण चर्चा में रहा। एक ओर नीट यूजी 2026 के आधार पर एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश का पहला चरण शुरू हो गया, वहीं दूसरी ओर बदलते मौसम और बारिश के बीच प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पहले चरण में 2560 अभ्यर्थियों को सीटें आवंटित की हैं, जबकि राज्य में एच1एन1 से संक्रमित मरीजों की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है।
जेएनएम मेडिकल कालेज में 54 अभ्यर्थियों को सीट
नीट यूजी 2026 की राज्य और प्रबंधन कोटे की पहली आवंटन सूची जारी होने के बाद एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में 54 अभ्यर्थियों को सीट मिली है। इनमें नीट की प्रावीण्य सूची में स्थान बनाने वाले टॉपर्स भी शामिल हैं।दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश की प्रक्रिया 27 अगस्त से 3 सितंबर तक चलेगी। शासकीय मेडिकल कालेज में सीट पाने वाले विद्यार्थियों का सत्यापन संबंधित संस्थान में होगा, जबकि निजी मेडिकल कालेजों में प्रवेश की प्रक्रिया आयुष विश्वविद्यालय के माध्यम से पूरी की जाएगी।
पहले दौर में आधी तक सीटें भरने की संभावना
जानकारों के मुताबिक पहले चरण में सरकारी मेडिकल कालेजों की एमबीबीएस सीटों को लेकर अभ्यर्थियों में अधिक रुचि रहने की संभावना है। अनुमान है कि पहले राउंड में करीब 40 से 50 फीसदी एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश हो सकता है। नए या निजी मेडिकल कालेज तथा बीडीएस में सीट पाने वाले कई विद्यार्थी बेहतर विकल्प की उम्मीद में अगले राउंड की काउंसिलिंग का इंतजार कर सकते हैं प्रदेश के 15 शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में यूजी स्तर पर कुल 1725 सीटें हैं। इनमें 15 फीसदी सीटें अखिल भारतीय कोटे के लिए हैं। शेष 1469 सीटें राज्य कोटे में आती हैं। इसके अलावा निजी मेडिकल कालेजों में करीब 1300 सीटें उपलब्ध हैं।
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 50 से अधिक मामले
इसी बीच बारिश के मौसम में एच1एन1 संक्रमण ने भी प्रदेश में दस्तक दी है। रायपुर समेत कई जिलों में 50 से अधिक संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है। वर्तमान में 11 मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है।रायपुर में चार एक्टिव केस हैं। दुर्ग में तीन तथा जशपुर, मनेंद्रगढ़, बिलासपुर और सरगुजा में एक एक मरीज उपचाराधीन है। रायपुर जिले में इस वर्ष अब तक 46 मरीज संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें 42 उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं।
मौसम बदलने के साथ बढ़ी सतर्कता की जरूरत
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार एच1एन1 इन्फ्लूएंजा समूह का वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और सीधे संपर्क में आने से फैल सकता है। लगातार तेज बुखार, गले में दर्द, शरीर में अधिक पीड़ा, सांस लेने में परेशानी और असामान्य थकान जैसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतने, जरूरत के अनुसार मास्क लगाने और खांसते या छींकते समय मुंह ढकने की अपील की है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
कोरोना के तीन मामले भी सामने आए
मौसमी संक्रमण के बीच रायपुर और बिलासपुर से कोरोना के तीन मामले भी सामने आए हैं। इन मरीजों में कोविड संक्रमण की पुष्टि हुई, हालांकि सभी में सामान्य लक्षण पाए गए। चिकित्सकों के अनुसार स्थिति गंभीर नहीं होने के कारण उन्हें विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं पड़ी।इस तरह प्रदेश में एक तरफ मेडिकल कालेजों में नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया तेज हो गई है, तो दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग मौसमी संक्रमणों पर निगरानी बढ़ा रहा है। विद्यार्थियों के प्रवेश से लेकर मरीजों के उपचार तक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए आने वाले दिन महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।