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Open prison launched for the first time in Chhattisgarh.
छत्तीसगढ़ में पहली बार खुली जेल की शुरुआत, दुर्ग सेंट्रल जेल में 50 बंदियों को मिलेगी बाहर काम करने की सुविधा
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में सुधारात्मक प्रशासन की दिशा में पहली बार अभिनव पहल करते हुए केंद्रीय जेल दुर्ग में ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन (OCI) यानी खुली जेल की शुरुआत की गई है। 22 सितंबर 2026 को डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने इसका औपचारिक शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्रीय जेल दुर्ग के जेल अधीक्षक मनीष संभाकर समेत जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
केंद्रीय जेल दुर्ग की मौजूदा अधोसंरचना का उपयोग करते हुए शुरू की गई इस खुली जेल में शुरुआती तौर पर 50 बंदियों को रखा जाएगा। इस व्यवस्था में चयनित बंदी निर्धारित समय पर सुबह जेल परिसर से बाहर जाकर काम कर सकेंगे और शाम को निर्धारित समय से पहले वापस जेल लौटेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य बंदियों पर लगातार निगरानी और नियंत्रण रखने के बजाय उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
अच्छे आचरण वाले बंदियों का होगा चयन
मनीष संभाकर अधीक्षक केंद्रीय जेल दुर्ग ने बताया कि ओपन जेल के लिए बंदियों के चयन की प्रक्रिया अगस्त में जारी किए गए नोटिफिकेशन में तय मापदंडों के आधार पर होगी। इसके लिए एक समिति भी बनाई गई है, जो बंदियों की पात्रता और आचरण समेत निर्धारित मानकों के आधार पर चयन करेगी।
उन्होंने बताया कि ऐसे बंदी जो पैरोल पर जाते रहे हैं, जिनका जेल में आचरण अच्छा रहा है और जिनका जेल में अपराध संबंधी रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ओपन जेल के लिए चुना जाएगा। वहीं गंभीर प्रकृति के अपराधों में शामिल बंदियों को इस सुविधा के लिए चयनित नहीं किया जाएगा।
सुबह जेल से बाहर, शाम को वापस लौटेंगे बंदी
ओपन जेल में बंदियों के बाहर जाने और वापस लौटने का समय भी निर्धारित किया गया है। मनीष संभाकर के मुताबिक, सुबह लॉकअप खुलने के बाद चयनित बंदी करीब 8 से 9 बजे के आसपास काम के लिए बाहर निकलेंगे, जबकि उन्हें शाम 6 बजे से पहले जेल परिसर में वापस प्रवेश करना होगा।
इस व्यवस्था में बंदियों को पूरी तरह स्वतंत्र नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि निर्धारित नियमों और निगरानी व्यवस्था के तहत उन्हें काम करने का अवसर मिलेगा।
शुरुआत में मुंगौड़ी सेंटर और गौशाला में करेंगे काम
जेल अधीक्षक ने बताया कि ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन को फिलहाल चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। शुरुआत में केंद्रीय जेल दुर्ग परिसर में मौजूद मुंगौड़ी सेंटर और गौशाला में बंदियों को काम पर लगाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था को पहले संचालित किया जाएगा और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसमें अन्य कार्यों और गतिविधियों को जोड़ा जाएगा।
काम के बदले बंदियों को मिलेगा पारिश्रमिक
ओपन जेल में काम करने वाले बंदियों को उनके श्रम के बदले पारिश्रमिक भी दिया जाएगा। मनीष संभाकर ने स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन और शासन की ओर से वर्तमान में बंदियों को जो पारिश्रमिक राशि दी जा रही है, वही व्यवस्था यहां भी लागू रहेगी।
यानी खुली जेल में शामिल बंदियों को काम करने का अवसर मिलने के साथ-साथ उनके श्रम के बदले निर्धारित पारिश्रमिक भी मिलेगा।
बड़े और गंभीर अपराध वाले बंदियों को नहीं मिलेगी सुविधा
ओपन जेल में किन बंदियों को रखा जाएगा, इसे लेकर जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी कैदियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। सवाल किए जाने पर कि जेल में पॉक्सो मामलों, सरकारी कर्मचारियों की हत्या और अन्य गंभीर अपराधों में बंद लोग भी रहते हैं, क्या उन्हें ओपन जेल की सुविधा मिलेगी?
इस पर जेल अधीक्षक मनीष संभाकर ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के बंदियों को ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन में चयनित नहीं किया जाएगा। चयन समिति द्वारा तय मापदंडों के आधार पर ही पात्र बंदियों का चयन किया जाएगा।
कम नियंत्रण में समाज से जुड़ने का मिलेगा मौका
मनीष संभाकर के मुताबिक, ओपन जेल का मुख्य उद्देश्य बंदियों पर न्यूनतम नियंत्रण रखते हुए उन्हें समाज के साथ दोबारा जोड़ना है। ऐसे बंदी जो जेल के भीतर अच्छे आचरण का प्रदर्शन कर चुके हैं, उन्हें धीरे-धीरे जिम्मेदारी के साथ बाहर काम करने का अवसर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के पीछे मुख्य सोच बंदियों का सोसायटी में इंटीग्रेशन और पुनर्वास है, ताकि सजा पूरी होने के बाद वे समाज में बेहतर तरीके से वापस लौट सकें।
छत्तीसगढ़ का पहला ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन
जेल अधीक्षक ने बताया कि देश के कई राज्यों में खुली जेल की व्यवस्था शुरू हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में केंद्रीय जेल दुर्ग पहला जेल है, जहां ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन की शुरुआत की गई है।
इस पहल को राज्य में जेल प्रशासन को केवल दंडात्मक व्यवस्था से आगे बढ़ाकर सुधार, पुनर्वास और समाज में पुनर्स्थापना की दिशा में ले जाने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल 50 बंदियों के साथ इसकी शुरुआत की गई है और आगे इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तार देने की तैयारी है।