

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Outrage grows over Sahil's death at IIT Bombay; Professor Dulla on leave... several major questions arise amidst the investigation.
मुंबई। आईआईटी बांबे में बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। छात्र की मौत के बाद संस्थान के बाहर विरोध प्रदर्शन जारी है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। बुधवार को पवई परिसर के मुख्य द्वार पर 'जस्टिस फॉर साहिल' प्रदर्शन हुआ। वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता सुजात आंबेडकर के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में छात्र की मौत की समयबद्ध और स्वतंत्र जांच के साथ कई अन्य मांगें भी उठाई गईं।मामले में आईआईटी बांबे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को छुट्टी पर भेज दिया है। इससे पहले उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारी से भी हटा दिया गया था। संस्थान ने छात्र की मौत से जुड़े घटनाक्रम की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की है। दूसरी ओर मुंबई क्राइम ब्रांच भी मामले की जांच कर रही है और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
बुधवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी आईआईटी बांबे के मुख्य द्वार के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने प्रोफेसर दुल्ला को पूरी तरह निलंबित करने और संस्थान के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे के इस्तीफे की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्र की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने तक संबंधित लोगों को उनके पदों से दूर रखा जाना चाहिए।प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भी भारी तैनाती रही। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने परिसर के अंदर जाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया। बाद में सुजात आंबेडकर को अधिकारियों से बातचीत के लिए परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई। उनके साथ पहुंचे समर्थकों का एक बड़ा हिस्सा मुख्य द्वार के बाहर ही रहा।
आईआईटी बांबे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने साहिल की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति बनाई है। समिति की अध्यक्षता प्रो. रमेश वेंकटेश्वरन कर रहे हैं, जो आईआईटी पालक्काड के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हैं। समिति में आईआईटी बांबे के तीन शिक्षक, तीन छात्र, एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, संस्थान के पूर्व सतर्कता अधिकारी और एक मनोचिकित्सक शामिल हैं। समिति को मामले की परिस्थितियों की पड़ताल कर रिपोर्ट देने का जिम्मा सौंपा गया है।आईआईटी प्रबंधन ने निष्पक्ष जांच के लिए प्रोफेसर दुल्ला को छुट्टी पर भेजने का फैसला किया है। वह फिलहाल कक्षाएं नहीं ले रहे हैं। इससे पहले उन्हें प्रशासनिक मामलों के डीन पद से हटा दिया गया था। संस्थान का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
साहिल वाकोडे की मौत 18 सितंबर को आईआईटी बांबे के पवई परिसर स्थित हॉस्टल में हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसी दिन परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन पाया गया था और आरोप है कि उन्होंने ChatGPT की मदद से प्रश्नों के उत्तर हासिल करने की कोशिश की थी।आईआईटी बांबे ने शुरुआती बयान में कहा था कि छात्र के खिलाफ तत्काल कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। संस्थान के अनुसार, परीक्षा से जुड़े मामले पर छात्र से बातचीत की गई और उसे काउंसलिंग दी गई थी। संस्थान ने यह भी कहा था कि उसे उसके अकादमिक भविष्य को लेकर आश्वस्त किया गया था। इसके बाद साहिल हॉस्टल लौट गए, जहां बाद में उनकी मौत हो गई।
रिपोर्टों के अनुसार, साहिल ने 18 सितंबर की दोपहर अपनी महिला मित्र से फोन पर बात की थी। यह उनकी आखिरी ज्ञात फोन बातचीत बताई जा रही है। इस बातचीत में उन्होंने परीक्षा से जुड़ी परेशानी का जिक्र किया था और कहा था कि उनका पिछला थर्मोडायनामिक्स का पेपर भी अच्छा नहीं गया था।पुलिस ने उनकी महिला मित्र का बयान दर्ज किया है। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, इस बातचीत में साहिल ने कथित जातिगत भेदभाव या प्रताड़ना का उल्लेख नहीं किया था। हालांकि, यह तथ्य अपने आप में परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों का निष्कर्ष तय नहीं करता। मामले में पुलिस अन्य साक्ष्यों और बयानों की भी जांच कर रही है।
साहिल के पिता रविंद्र ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को जातिगत आधार पर मानसिक रूप से परेशान किया गया। परिवार ने प्रोफेसर दुल्ला सहित संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और कार्रवाई की मांग की है। दुल्ला का नाम आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी एफआईआर में दर्ज है, जबकि मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच के पास है।परिवार का आरोप है कि साहिल पर कई हफ्तों से दबाव बनाया जा रहा था। दूसरी ओर, संस्थान से जुड़े शिक्षकों के एक वर्ग ने प्रोफेसर दुल्ला का समर्थन किया है और कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। ऐसे में मामले में सामने आ रहे अलग-अलग दावों की जांच पुलिस और संस्थान की समितियों के स्तर पर की जा रही है।
मुंबई क्राइम ब्रांच साहिल की मौत से पहले के घटनाक्रम को क्रमवार तरीके से समझने की कोशिश कर रही है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल से जुड़े डिजिटल साक्ष्य और छात्रों तथा शिक्षकों के बयान अहम माने जा रहे हैं। क्राइम ब्रांच ने कई छात्रों के बयान दर्ज किए हैं और जांच के आगे बढ़ने के साथ एफआईआर में नामजद लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि परीक्षा के दौरान हुई घटना के बाद साहिल के साथ क्या-क्या हुआ और उसके बाद के कुछ घंटों में घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा। इसी क्रम में परीक्षा कक्ष से लेकर हॉस्टल तक की गतिविधियों को जोड़कर देखा जा रहा है।
साहिल की मौत के बाद आईआईटी बांबे के छात्रों ने कई मांगें रखी हैं। इनमें स्वतंत्र जांच, छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार, शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना और परिसर में चौबीसों घंटे मनोचिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल हैं। छात्रों के एक वर्ग ने प्रोफेसर दुल्ला को जांच पूरी होने तक उनके शिक्षकीय दायित्वों से दूर रखने की मांग भी की है।हालांकि छात्रों के बीच भी प्रोफेसर दुल्ला को लेकर पूरी तरह एक जैसी राय सामने नहीं आई है। कुछ छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य जांच के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करना है और किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी मानना नहीं है।
साहिल वाकोडे की मौत को लेकर फिलहाल दो स्तरों पर जांच चल रही है। एक तरफ मुंबई क्राइम ब्रांच आपराधिक पहलुओं और लगाए गए आरोपों की पड़ताल कर रही है, वहीं आईआईटी बांबे की 10 सदस्यीय समिति संस्थान के भीतर घटनाक्रम और छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा करेगी।परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोप, परीक्षा के दौरान मोबाइल और ChatGPT के इस्तेमाल से जुड़ा घटनाक्रम, साहिल की आखिरी बातचीत और मौत से पहले के कुछ घंटे जांच के प्रमुख हिस्से हैं। ऐसे में आने वाली जांच रिपोर्ट और पुलिस की पड़ताल यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी कि 18 सितंबर को परीक्षा से लेकर साहिल की मौत तक घटनाएं किस क्रम में हुईं और किन परिस्थितियों ने इस पूरे मामले को जन्म दिया।