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Pakistans Defense Minister Khawaja Asif made a major statement urging Trump to kidnap Netanyahu
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका और इजरायल को लेकर एक बेहद विवादित बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि यदि अमेरिका वास्तव में मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून में विश्वास रखता है, तो उसे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अगवा कर अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमे का सामना कराना चाहिए।
ख्वाजा आसिफ ने कहा,
“अगर अमेरिका मानवता में विश्वास रखता है, तो उसे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का अपहरण कर लेना चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के मामले में किया था।”
गाजा युद्ध का किया जिक्र
पाक रक्षा मंत्री ने यह बयान गाजा में जारी संघर्ष और वहां हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के संदर्भ में दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों पर हमले किए जा रहे हैं और इसके लिए इजरायली नेतृत्व सीधे तौर पर जिम्मेदार है। आसिफ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर अमेरिका, इन घटनाओं पर दोहरा रवैया अपना रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कानून पर सवाल
ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन चुनिंदा देशों के मामले में ही करता है। उन्होंने दावा किया कि जब बात अमेरिका के हितों की होती है, तब वह किसी भी देश के नेता के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाता, लेकिन अपने सहयोगियों के मामले में चुप्पी साध लेता है।
बयान से बढ़ा राजनीतिक विवाद
ख्वाजा आसिफ के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान की ओर से इजरायल-गाजा युद्ध पर बढ़ती नाराजगी और अमेरिका के प्रति असंतोष को दर्शाता है। हालांकि, अमेरिका या इजरायल की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पहले भी दे चुके हैं तीखे बयान
यह पहली बार नहीं है जब ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका और इजरायल पर तीखी टिप्पणी की हो। इससे पहले भी वह गाजा में हो रही घटनाओं को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना करते रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय न्याय की मांग उठाते रहे हैं।
इस बयान के बाद यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान सरकार आधिकारिक तौर पर इस टिप्पणी से खुद को किस तरह जोड़ती है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसका क्या असर पड़ता है।