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Payments stalled for seven months; cow protectors protest at the Municipal Corporation headquarters against the dilapidated state of Gothans and take out a 'Godhan Nyay' march accompanied by cows and calves.
रायपुर। गोठानों के संचालन का बकाया भुगतान नहीं मिलने से नाराज संचालकों और गोसेवकों ने शुक्रवार को नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाठागांव से गोधन न्याय पदयात्रा निकालकर प्रदर्शनकारी गायों और बछड़ों के साथ नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने जमकर नारेबाजी की और गोवंश के रखरखाव के लिए लंबित राशि का तत्काल भुगतान करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में साधु-संतों, किन्नर अखाड़े के सदस्यों और गोठान संचालकों ने भी हिस्सा लिया।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि समय पर भुगतान नहीं होने के कारण गोठानों का संचालन मुश्किल हो गया है। चारा-पानी और देखभाल के लिए जरूरी संसाधनों की कमी का सीधा असर गोवंश पर पड़ रहा है। विरोध के दौरान एक गोसेवक ने नगर निगम मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर गोबर मिले पानी से स्नान कर अपना आक्रोश जताया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ उसकी बहस भी हुई। बाद में प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने निगम अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं।
गोठानों का संचालन करने वाली तीन समितियों और एजेंसियों के भुगतान का मामला लंबे समय से लंबित बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फुंडहर गोठान संचालित करने वाली पहल सामाजिक विकास समिति की करीब 44 लाख रुपये की राशि अटकी हुई है। गोकुल नगर गोठान का संचालन करने वाली अग्र सेवा समिति को लगभग आठ लाख रुपये मिलने बाकी हैं। वहीं, जरवाय और अटारी गोठानों का संचालन करने वाली नीश कंस्ट्रक्शन का करीब 17 लाख रुपये का भुगतान लंबित है।गोकुल नगर गोठान में निर्धारित क्षमता से अधिक मवेशी होने का मुद्दा भी उठाया गया है। संचालकों के मुताबिक, यहां 580 मवेशियों की क्षमता के मुकाबले 650 से अधिक पशु रखे गए हैं। ऐसे में चारे, पानी और देखभाल की व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
फुंडहर गोठान में अगस्त के दौरान बड़ी संख्या में गायों की मौत होने के मामले ने पहले ही नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद गोसेवा आयोग की टीम ने गोठान का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान भुगतान में देरी, अव्यवस्थाओं और बारिश के बीच खुले स्थानों पर मवेशियों को रखने से जुड़ी समस्याएं सामने आने की बात कही गई थी।मामले के बाद निगम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी गोठान का दौरा किया। मवेशियों को रखने के लिए बांस, बल्ली और तिरपाल की मदद से अस्थायी इंतजाम किए गए। गोठान में शेड निर्माण के लिए प्रभारी मंत्री केदार कश्यप की ओर से 25 लाख रुपये की स्वीकृति दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि, संचालकों का कहना है कि बकाया राशि का समय पर भुगतान नहीं होने से जमीनी स्तर पर समस्याएं बनी हुई हैं।
फुंडहर गोठान के भुगतान विवाद की एक प्रमुख वजह अनुबंध में तय मवेशियों की संख्या और वास्तविक संख्या के बीच अंतर बताया जा रहा है। नगर निगम ने गोठान संचालक के साथ 260 गायों की देखरेख का अनुबंध किया था। संचालक विक्रांत शर्मा का आरोप है कि निगम ने इसके बावजूद गोठान में लगातार इससे अधिक मवेशी भेजे और एक समय उनकी संख्या 550 से ऊपर पहुंच गई।संचालक के अनुसार, अतिरिक्त गायों के भोजन, देखभाल और रखरखाव पर हुए खर्च का बिल जोन कार्यालय में प्रस्तुत किया गया था। लेकिन निगम अनुबंध में निर्धारित शर्तों के आधार पर भुगतान करने पर जोर देता रहा। दूसरी ओर, संचालक वास्तविक रूप से रखे गए मवेशियों की संख्या के अनुसार खर्च की राशि मांग रहे हैं। इसी मतभेद के कारण भुगतान को लेकर विवाद बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, निरीक्षण और समीक्षा के बाद जून, जुलाई तथा अगस्त की अवधि के लिए करीब 14 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। हालांकि, संचालक का कहना है कि नवंबर से मई तक की बकाया राशि अब भी नहीं मिली है। भुगतान में देरी के चलते गोठान के संचालन पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।फुंडहर गोठान के संचालक विक्रांत शर्मा ने बताया कि नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने पूरी फाइल की जांच कराकर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनका अनुबंध 31 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है और अब तक के अनुभव को देखते हुए वे आगे गोठान का संचालन जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गोवंश संरक्षण के लिए योजनाएं और व्यवस्थाएं बनाने की बात तो की जाती है, लेकिन गोठानों में चारा, पानी और सुरक्षित आश्रय जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में लगातार परेशानी आ रही है। उनका आरोप है कि आर्थिक संकट के कारण संचालक अपने घर और जमीन तक गिरवी रखने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर गोठानों का संचालन प्रभावित होना स्वाभाविक है।गोसेवकों ने सड़कों पर घूम रहे मवेशियों के वाहनों की चपेट में आने की समस्या भी उठाई। उन्होंने निगम प्रशासन से गोठानों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने, लंबित भुगतान का निपटारा करने और गोवंश के लिए नियमित भोजन-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान गोसेवक नगर निगम आयुक्त से मुलाकात की मांग पर अड़े रहे। देर शाम आयुक्त कार्यालय पहुंचे तो गोठान संचालक विक्रांत शर्मा और अन्य प्रतिनिधियों ने उनके सामने बकाया भुगतान का मुद्दा रखा। आयुक्त ने संबंधित दस्तावेजों की जांच कराकर भुगतान की कार्रवाई करने का भरोसा दिया।हालांकि, प्रदर्शनकारियों के सामने अब भी यह सवाल बना हुआ है कि लंबित राशि का भुगतान कब तक होगा और गोठानों की व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे। संचालकों का कहना है कि केवल आश्वासन से उनकी आर्थिक परेशानी दूर नहीं होगी। गोवंश की देखभाल जारी रखने के लिए भुगतान और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था समय पर करना जरूरी है।