

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Political row over SIR intensifies; BJP challenges Rahul Gandhi to answer 10 questions.
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। विपक्षी दल जहां चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की एकजुटता दिखाते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया है। मंगलवार को भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ जदयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा।पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को पद से हटने के बाद राजनीतिक लाभ दिए जाते थे। उन्होंने कहा कि केरलम के कांग्रेस नेता एसआइआर की सराहना कर रहे हैं, जबकि राहुल गांधी इसकी आलोचना कर रहे हैं। गोयल ने राहुल गांधी को एसआइआर और वोट चोरी के आरोपों से जुड़े 10 सवालों के जवाब देने की चुनौती भी दी। उनका दावा था कि राहुल इन सवालों का जवाब नहीं दे पाएंगे।
पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के व्यवहार को बचकाना और कायराना बताते हुए कांग्रेस की कानूनी तैयारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई वरिष्ठ वकीलों को राज्यसभा भेजा है, लेकिन इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट में ठीक ढंग से याचिका दाखिल नहीं कर सकी और कोर्ट फीस भी पूरी नहीं भरी।गोयल ने आरोप लगाया कि जो राजनीतिक दल अराजकता, झूठ और फरेब की राजनीति करता है, वह देश को बेहतर भविष्य देने का दावा कैसे कर सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसी राजनीति 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं पर खरी उतर सकती है।
वोट चोरी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि राजग सरकार ने किसी चुनाव आयुक्त को राजनीतिक लाभ देने का प्रयास नहीं किया। इसके विपरीत उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को मिले पदों और नियुक्तियों का उल्लेख किया।गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें 1999 के संसदीय चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने यह भी कहा कि 1996 से मुख्य चुनाव आयुक्त रहे एमएस गिल को कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाया गया था।गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त आरके द्विवेदी का भी उल्लेख किया और कहा कि सेवानिवृत्ति के दो महीने के भीतर उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उन्होंने नवीन चावला की नियुक्ति और केरलम के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी रत्न यू. केलकर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। गोयल के अनुसार, केलकर को हालिया चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया।
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि देश में पहले कभी किसी राजनीतिक दल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने जाकर इस तरह प्रदर्शन नहीं किया। उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने और उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।ललन सिंह ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, राजनीतिक विरोध के नाम पर संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट और देश के अन्य न्यायालय परिसरों में राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में अदालत परिसरों के भीतर राजनीतिक जुलूस, धरना, नारेबाजी, झंडे-बैनर के प्रदर्शन और राजनीतिक प्रेस कॉन्फ्रेंस पर रोक लगाने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।याचिका में कहा गया है कि अदालत परिसरों की सुरक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विचाराधीन मामलों पर राजनीतिक दबाव रोकने के लिए स्पष्ट नियम होने चाहिए।चार वकीलों दिगांत मिश्रा, दिव्यांश बिस्ट, आशीष गोपाल गर्ग और श्वेता गर्ग ने अधिवक्ता उत्कर्ष जायसवाल के माध्यम से याचिका दाखिल की है। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के समक्ष इसका उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की।
पीठ ने याचिका पर गुरुवार को अन्य मामलों के साथ सुनवाई करने की बात कही। हालांकि, इससे पहले याचिका में बताई गई तकनीकी कमियों को दूर करना होगा।याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 12 अक्टूबर को चुनाव संबंधी मुद्दों और एसआइआर को लेकर कुछ नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। याचिका में ऐसे प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा गया है कि न्यायिक संस्थानों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए।