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Political stir intensifies over Mohan Bhagwat's Canada visit... Over 100 Hindu organizations make a major appeal to the government.
वाशिंगटन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कनाडा दौरे को लेकर वहां राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। 100 से अधिक कनाडाई हिंदू और नागरिक अधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार से भागवत को कनाडा आने की अनुमति देने की अपील की है।इन संगठनों ने भागवत को कनाडा में प्रवेश से रोकने की मांग का विरोध करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के आव्रजन या सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े फैसले राजनीतिक दबाव के आधार पर नहीं लिए जाने चाहिए।
संगठनों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के अलावा सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगरी, आव्रजन मंत्री लीना मेटलेज डियाब और विदेश मंत्री अनीता आनंद को संयुक्त पत्र भेजा है।पत्र में कहा गया है कि भागवत से संबंधित किसी भी निर्णय के लिए विश्वसनीय प्रमाण, निष्पक्ष प्रक्रिया और कनाडा के कानूनों को आधार बनाया जाना चाहिए। संगठनों ने राजनीतिक दबाव के आधार पर उनके प्रवेश पर रोक लगाने की मांग को उचित नहीं माना है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद जेनी क्वान और हीथर मैकफर्सन सहित कुछ संगठनों की ओर से भागवत को कनाडा आने से रोकने की मांग की गई है।इसके जवाब में समर्थन करने वाले संगठनों का कहना है कि किसी व्यक्ति के प्रवेश पर फैसला करते समय ठोस साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
समर्थन में जारी पत्र के मुताबिक कनाडा में हिंदू समुदाय की आबादी 10 लाख से अधिक है और भागवत का प्रस्तावित दौरा इस समुदाय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भारत का एक प्रमुख सामाजिक संगठन बताते हुए कहा कि वह सामुदायिक सेवा, सामाजिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक संवाद से जुड़े कार्यों में सक्रिय है।
संगठनों ने चेतावनी दी कि बिना ठोस आधार के भागवत के प्रवेश पर रोक लगाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के तहत समान व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।फिलहाल भागवत के प्रस्तावित कनाडा दौरे को लेकर समर्थन और विरोध, दोनों तरह की आवाजें सामने आ रही हैं। ऐसे में अब निगाहें कनाडा सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।