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Political uproar over the paper leak controversy spans from Parliament to the streets; no consensus reached between the government and the opposition... pressure mounts on the students' protest as well.
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर संसद में जारी गतिरोध बुधवार को भी खत्म नहीं हो सका। लगातार तीसरे दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। सरकार ने जहां नीट मामले पर चर्चा की पेशकश की, वहीं विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग पर अड़ा रहा।दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण आखिरकार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार नीट पेपर लीक मामले पर गंभीर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष लगातार नई शर्तें रखकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा हो और सभी पहलुओं पर बात रखी जाए।वहीं राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष पर संसद की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य छात्रों के हितों पर चर्चा करना नहीं बल्कि राजनीतिक माहौल बनाना है।दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक नीट मामले पर चर्चा नहीं होगी।
नीट विवाद में विपक्ष के बीच भी अलग-अलग राय सामने आई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा बाद में भी हो सकता है, लेकिन फिलहाल छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और उनकी समस्याओं पर चर्चा जरूरी है।उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि छात्रों का विरोध पूरी तरह जायज है और उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार घबराहट में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम और प्रधानमंत्री से माफी की मांग की।उन्होंने कहा कि छात्र कोई अपराधी नहीं हैं, बल्कि अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे युवा हैं।
नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के प्रदर्शन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन को राजनीतिक दलों से अलग बनाए रखने की है।कई विपक्षी नेता छात्रों के समर्थन में सामने आ चुके हैं, लेकिन प्रदर्शन स्थल पर अभी तक किसी राजनीतिक दल का झंडा या नेता की तस्वीर नजर नहीं आ रही है।आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य छात्रों की मांगों को सामने रखना है। कई प्रदर्शनकारी अब भी पुलिस कार्रवाई के बाद घायल अवस्था में धरने पर बैठे हैं।लखनऊ की नीट अभ्यर्थी सारगर्भित श्रीवास्तव ने कहा कि पेपर लीक ने छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है और वे अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
नीट आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार अब संसद के साथ-साथ जंतर-मंतर पर भी गतिरोध खत्म करने की कोशिश कर रही है।सूत्रों के अनुसार सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं के बीच बातचीत का रास्ता तलाशा जा रहा है। संगठन ने पहले नेताओं से उनके कार्यालय या आवास पर मिलने से इनकार किया था और धरना स्थल पर आकर बातचीत की मांग रखी थी।सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के जरिए बातचीत शुरू करने के संकेत मिले हैं।
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पवार ने बताया कि बैठक में नीट पेपर लीक, छात्रों की मांगों, किसानों की समस्याओं, जल प्रबंधन और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नीट विवाद को लेकर कई फिल्मी हस्तियां भी छात्रों के समर्थन में सामने आई हैं। अभिनेता सलमान खान ने पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि छात्रों की परेशानी को समझना जरूरी है।इसके अलावा नसीरुद्दीन शाह, अरिजीत सिंह, राजकुमार राव, स्वरा भास्कर, प्रीति जिंटा और अनुपम खेर समेत कई कलाकारों ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया है।
नीट पेपर लीक मामला अब केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह संसद, सड़क और राजनीतिक मंचों पर बड़ा मुद्दा बन चुका है।सरकार चर्चा के जरिए समाधान का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष जवाबदेही तय करने की मांग पर कायम है। ऐसे में छात्रों के आंदोलन और संसद के गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।