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Political war over Jheeram massacre: BJP and Congress face off on social media
रायपुर। नक्सलवाद के समाप्ति की घोषणा के अगले ही दिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में झीरम घाटी हत्याकांड ने नया उबाल लिया। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए और मोर्चा संभाला रखा।
रमन का कटाक्ष: भूपेश की जेब में नहीं सबूत, सिर्फ अखबार की कतरन
डॉ. रमन सिंह ने भूपेश बघेल के ‘जेब में सबूत’ होने के दावे पर तंज किया। उन्होंने कहा कि भूपेश की जेब में झीरम घाटी हत्याकांड का कोई ठोस प्रमाण नहीं, केवल अखबार की कतरन है। रमन ने आरोप लगाया कि पांच साल के कार्यकाल में केवल दोषारोपण किया गया, जबकि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भूपेश का जवाब: भाजपा जांच में बाधा डाल रही है
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए भाजपा पर जांच में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डॉ. रमन की पार्टी ने कभी जांच को पूरा होने नहीं दिया। भूपेश ने चेतावनी दी कि जांच के बाद सबूत सामने आएंगे और भाजपा को बाद में पछताना पड़ सकता है।
झीरम घाटी नरसंहार: 8 साल की सुनवाई और 150 से अधिक गवाह
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में हुई गोलीबारी ने छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश को हिलाकर रख दिया। कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर हमले में विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और नंदकुमार पटेल सहित 32 लोग शहीद हुए।
इस नरसंहार की जांच के लिए जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा आयोग बनाया गया। आयोग ने 8 साल की सुनवाई के बाद 4,184 पन्नों और 10 वॉल्यूम में रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान 150 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें बचे नेता, तत्कालीन सुरक्षा अधिकारी और चश्मदीद शामिल थे। आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं आ सकी क्योंकि कार्यकाल को 20 से अधिक बार बढ़ाया गया।