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Politics intensifies over FCRA Amendment Bill: Imran Masood targets central government, opposition protests
नई दिल्ली। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि यह बिल खास तौर पर कुछ समुदायों को प्रभावित कर सकता है।
न्यूज एजेंसी से बातचीत में मसूद ने कहा कि इस विधेयक का सबसे ज्यादा असर ईसाई समुदाय पर पड़ेगा और उसके बाद मुस्लिम समुदाय प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कदम आगामी केरल विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
क्या है FCRA संशोधन बिल?
यह विधेयक Foreign Contribution Regulation Act 2010 (FCRA) में संशोधन से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी फंड की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। यह बिल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था।
संशोधन के तहत प्रमुख प्रावधानों में विदेशी चंदा लेने वाली संस्थाओं को फंड किसी अन्य संस्था को ट्रांसफर करने से रोकना, सभी फंड को एक निर्धारित बैंक खाते में प्राप्त करना और प्रशासनिक खर्च की सीमा को 50% से घटाकर 20% करना शामिल है।
विपक्ष का आरोप- केंद्रीकरण और टारगेटिंग
विपक्षी दलों ने इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए संस्थानों पर केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित करने और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।
‘सरकार के साथ खड़े हैं, लेकिन…’
इमरान मसूद ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों, खासकर पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कांग्रेस सरकार के साथ खड़ी है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार को विपक्ष के समर्थन को स्वीकार करना चाहिए और संवाद की पहल करनी चाहिए।
सपा ने भी जताया विरोध
वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले बिल लाने से इनकार करती है और फिर उसे पेश कर देती है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।