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Press freedom controversy during Norway visit: India gives clear and strong response, expresses confidence in democracy
नई दिल्ली। ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान प्रेस ब्रीफिंग में उठे प्रेस स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के सवाल पर भारत ने कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है। भारत ने कहा कि देश अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान में दी गई स्वतंत्रता पर पूरी तरह भरोसा करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस ब्रीफिंग में एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछने के प्रयास के बाद यह विवाद चर्चा में आ गया।
भारत का जवाब लोकतंत्र और संविधान पर पूरा भरोसा
विदेश मंत्रालय के सचिव पश्चिम सिबी जार्ज ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और उसे अपने संवैधानिक मूल्यों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकार भारत की मजबूत नींव हैं।विदेश मंत्रालय, भारतने साफ किया कि भारत को लेकर कई बार सीमित और पक्षपातपूर्ण रिपोर्टों के आधार पर गलत धारणा बना ली जाती है।
विवाद कैसे शुरू हुआ प्रेस ब्रीफिंग में सवाल को लेकर बहस
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब नॉर्वे की पत्रकार और टिप्पणीकार हेला लेंग स्वेंडसन ने संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में सवाल पूछने की कोशिश की। हालांकि पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि दोनों नेताओं की ओर से मीडिया प्रश्न नहीं लिए जाएंगे।इसके बावजूद पत्रकार द्वारा सवाल पूछने के प्रयास के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया।
प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग पर सोशल मीडिया बहस
पत्रकार ने बाद में सोशल मीडिया पर भारत और नॉर्वे की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि नॉर्वे शीर्ष स्थान पर है जबकि भारत की स्थिति अलग है।इस टिप्पणी के बाद भारत की प्रेस स्वतंत्रता को लेकर बहस और तेज हो गई।
भारत का पलटवार विशाल देश को समझे बिना निष्कर्ष गलत
विदेश मंत्रालय के अधिकारी सिबी जार्ज ने कहा कि भारत दुनिया की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा है और इतने विविध देश को समझे बिना केवल कुछ रिपोर्टों के आधार पर निष्कर्ष निकालना गलत है।उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और अभिव्यक्ति की आजादी देता है।