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Protest lasts 10 hours; residents of Nakti village stand firm on displacement issue, demanding a concrete guarantee of rehabilitation from the administration.
रायपुर। नकटी गांव में विधायक आवास परियोजना के लिए किए गए विस्थापन के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश बुधवार को खुलकर सामने आया। प्रभावित परिवारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर लंबा प्रदर्शन किया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ धरना रात लगभग नौ बजे प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने के बाद समाप्त हुआ। पूरे दिन कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग भी की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने पर्याप्त पुनर्वास सुनिश्चित किए बिना करीब 80 मकानों को ध्वस्त कर दिया। उनका आरोप है कि बरसात के मौसम में जल्दबाजी में की गई इस कार्रवाई ने कई परिवारों को गंभीर मुश्किलों में डाल दिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि पहले सम्मानजनक पुनर्वास किया जाए, उसके बाद ही किसी तरह का विस्थापन स्वीकार होगा।
प्रभावित परिवारों ने नवा रायपुर सेक्टर-30 में आवंटित ईडब्ल्यूएस मकानों को लेकर भी असंतोष जताया। उनका कहना है कि मकानों का आकार छोटा है और वहां पानी, सड़क सहित कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों के मुताबिक मौजूदा व्यवस्था उनके परिवारों की जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
धरना देर शाम तक जारी रहा। कलेक्ट्रेट कार्यालय बंद होने के बावजूद प्रदर्शनकारी परिसर के बाहर डटे रहे। हालात ऐसे बने कि अधिकारियों को बाहर निकालने के लिए खाद्य विभाग की ओर से ग्रिल काटनी पड़ी। इस दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार बातचीत का दौर चलता रहा।
प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने भी भाग लेकर ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया। कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार मेमन ने कहा कि परियोजना के लिए अधिग्रहित 66 एकड़ भूमि में से कम से कम छह एकड़ जमीन प्रभावित परिवारों को दी जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ग्रामीणों को भूमि का पट्टा देकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग मौजूद रहे। देर रात तक करीब डेढ़ सौ ग्रामीण आंदोलन में डटे रहे और पुनर्वास से जुड़ी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की मांग करते रहे।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वह शुरू से ही नकटी गांव के ग्रामीणों के साथ खड़े हैं। उनके अनुसार 7 जून 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर गरीबों के मकान नहीं तोड़ने का आग्रह किया गया था। इसके बाद 27 जून 2026 को अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्रवाई रोकने की मांग भी रखी गई थी। उनका कहना है कि संतोषजनक पुनर्वास सुनिश्चित होने से पहले किसी भी परिवार का विस्थापन नहीं किया जाना चाहिए।