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RSS will make Pasmanda Muslims economically strong
Pasmanda Muslims: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े पसमांदा मुस्लिमों को तेजी से सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगा। संघ का मानना है कि पसमांदा मुस्लिम समाज शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में लंबे समय से पिछड़ा रहा है, इसलिए उनके उत्थान के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं। इस दिशा में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
संघ की गुरुवार सुबह हुई एक छोटी टोली की बैठक में पसमांदा मुस्लिम समाज को लेकर गहन चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि पसमांदा समाज को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने के प्रयासों को और तेज किया जाएगा तथा उन्हें संघ की विचारधारा से जोड़ने के लिए संगठित कार्यक्रम चलाए जाएंगे। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच पहले से ही इस दिशा में काम कर रहा है, लेकिन अब इसे और व्यापक तथा प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में बताया गया कि पसमांदा मुस्लिमों में बड़ी संख्या कारीगरों, बुनकरों और पारंपरिक कामों से जुड़े वर्गों की है, जो शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी में काफी पीछे हैं। मुस्लिम समाज के भीतर भी उनके विकास और उत्थान को लेकर पर्याप्त प्रयास नहीं हो पाए हैं। इसी कारण पसमांदा समाज लंबे समय से सामाजिक न्याय और आरक्षण के पुनर्गठन की मांग करता रहा है।
संघ की योजना है कि पसमांदा मुस्लिमों के उत्थान से जुड़े कार्यक्रमों को सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाया जाए। इसके लिए जल्द ही राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें पूरी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस योजना में शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार के अवसर और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके साथ ही बैठक में अन्य पिछड़े वर्गों को भी अधिक सक्षम बनाने पर विचार किया गया। पिछड़े वर्गों से जुड़े लोगों को सरकारी योजनाओं और लाभों से किस तरह अधिक जोड़ा जा सकता है तथा उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार कैसे लाया जाए, इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन सभी विषयों पर एक विस्तृत मसौदा जल्द तैयार किए जाने की बात कही गई।
शाम को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आनुषांगिक संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ बैठक कर सामाजिक समरसता और विभिन्न वर्गों के उत्थान से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। संघ का स्पष्ट संदेश है कि समाज के सभी पिछड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जाएगा।