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Raghu Rai, who shocked the world with his tragic Bhopal photo, is no more.
नई दिल्ली। भारत की फोटोग्राफी दुनिया के एक बड़े नाम, प्रतिष्ठित छायाकार रघु राय का निधन हो गया। 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। अपने पीछे वे पत्नी, एक बेटे और तीन बेटियों का परिवार छोड़ गए हैं। उनके जाने से भारतीय फोटोग्राफी जगत में एक बड़ा खालीपन महसूस किया जा रहा है।
छह दशक का सफर, हर फ्रेम में इतिहास की झलक
रघु राय ने अपने करियर की शुरुआत 1966 में द स्टेट्समैन अखबार से की थी। इसके बाद करीब छह दशकों तक उन्होंने अपने कैमरे से ऐसे पलों को कैद किया, जो हमेशा के लिए इतिहास का हिस्सा बन गए। वे 50 से अधिक किताबों के लेखक भी रहे और उनका मानना था कि तस्वीरें ही सबसे सच्चा दस्तावेज होती हैं।
उन्हें 1972 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया, जबकि 2009 में फ्रांस सरकार ने उन्हें अपने नागरिक सम्मान से नवाजा। उनका जन्म 18 दिसंबर 1942 को हुआ था।
वो तस्वीर जिसने दुनिया को रुला दिया
रघु राय की पहचान केवल एक फोटोग्राफर के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कहानीकार के रूप में भी थी। भोपाल गैस त्रासदी की एक तस्वीर ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। इस तस्वीर में एक मासूम बच्चे का चेहरा था, जिसकी आंखें खुली हुई थीं और मानो दुनिया से सवाल कर रही थीं।
इस तस्वीर को लेकर खुद रघु राय ने कहा था कि जब वे कब्रिस्तान पहुंचे, तो उन्होंने एक व्यक्ति को अपने हाथों से मिट्टी हटाकर बच्चे को दफनाते देखा। उस बच्चे के चेहरे पर जो सन्नाटा था, वह किसी भी चीख से ज्यादा गूंजदार था। उन्होंने एक पल के लिए सोचा कि क्या इस क्षण को कैमरे में कैद करना सही है, लेकिन फिर उन्हें लगा कि अगर यह सच दुनिया तक नहीं पहुंचेगा, तो इस दर्द की गहराई कभी समझ नहीं आएगी।
फोटोग्राफी को माना जिम्मेदारी, सिर्फ कला नहीं
रघु राय के लिए फोटोग्राफी केवल पेशा नहीं थी, बल्कि एक जिम्मेदारी थी। वे मानते थे कि कैमरा समाज के सच को सामने लाने का सबसे सशक्त माध्यम है। उनके हर फ्रेम में केवल दृश्य नहीं, बल्कि एक गहरी कहानी और भावनाएं छिपी होती थीं।
एक तस्वीर के पीछे छिपी अनोखी कहानी
उन्होंने अपने जीवन के एक खास अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि एक गांव में बच्चों की तस्वीर लेते समय एक बुजुर्ग महिला का चेहरा उन्हें बेहद आकर्षित लगा। वे उनकी तस्वीर लेना चाहते थे, लेकिन बच्चे बार बार फ्रेम में आ जाते थे। आखिरकार उस महिला ने बच्चों से कहा कि अगर वे उनके साथ फोटो चाहते हैं, तो उन्हें उनके बच्चे बनना होगा। इस सहज और भावनात्मक पल ने एक अनोखी तस्वीर को जन्म दिया।
सख्त नियम और जिम्मेदारी की सोच
समाज और व्यवस्था को लेकर भी सख्त संदेश दिए जा रहे हैं। खाली पड़ी जमीन या संसाधनों का गलत इस्तेमाल करने वालों पर सख्ती की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर आर्थिक दंड देना होगा, जबकि उचित प्रक्रिया के तहत पट्टा फिर से बहाल कराया जा सकेगा। ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रगति जारी है और उत्पादन क्षमता हजार मेगावॉट तक पहुंच चुकी है।
रघु राय की विरासत हमेशा जिंदा रहेगी
रघु राय भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी तस्वीरें हमेशा बोलती रहेंगी। उन्होंने जो देखा, उसे दुनिया के सामने ईमानदारी से रखा। यही वजह है कि उनका काम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।