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Ram Mandir offering theft case: Supreme Court says politics should not interfere in the investigation of the crime.
नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह अपराध की जांच का मामला है, इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि क्या निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए नई एसआईटी (SIT) गठित की जा सकती है।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने राज्य सरकार से इस मामले में निर्देश लेकर जानकारी देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गठित एसआईटी में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और एक आईएएस अधिकारी शामिल थे। कोर्ट ने पूछा कि क्या मुख्य आपराधिक जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की अगुवाई वाली नई एसआईटी को सौंपी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि जांच निष्पक्ष हो और तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे।
चढ़ावा गिनने की व्यवस्था में भी बदलाव
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया में बदलाव शुरू कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत गणनाकर्मियों के लिए नीली की जगह भगवा यूनिफॉर्म लागू की गई है। बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक भी हुई, जिसमें इस्तीफा दे चुके कर्मचारियों को बुलाया गया था।
ट्रस्ट की बैठक 22 जुलाई को अयोध्या में प्रस्तावित है, जिसमें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट, समितियों के पुनर्गठन और प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा हो सकती है। वहीं, ट्रस्ट की नई कार्यप्रणाली और सीईओ की नियुक्ति पर भी फैसला संभव है।
कोर्ट ने निजी मंदिरों की संपत्तियों पर भी जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने निजी मंदिरों के सरकारी नियंत्रण से जुड़े मामले में कहा कि कई पुजारी मंदिरों की संपत्तियां बर्बाद कर रहे हैं। कोर्ट ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 237 वंशानुगत पुजारियों व निजी मंदिर मालिकों की याचिका पर सुनवाई की।
पीठ ने कहा कि मंदिरों की जमीन और संपत्तियों की सुरक्षा जरूरी है। कोर्ट ने संबंधित राज्यों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि ऐसे विवादों में दीवानी अदालत का रास्ता अपनाया जा सकता है।