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Registrations in Chhattisgarh affected by the indefinite strike of *patwaris* (village revenue officials) and the slow speed of online servers.
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में नवरात्र में जमीन-जायदाद की खरीदी-बिक्री का कारोबार रफ्तार पकड़ने के बजाय सुस्ती का शिकार हो गया है। एक तरफ पटवारियों की चार दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने रजिस्ट्री प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया है, तो दूसरी तरफ ऑनलाइन पंजीयन में सर्वर की धीमी गति और मोबाइल पर ओटीपी देर से आने की समस्या लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है।
अभी हालात ऐसे हैं, कि रजिस्ट्री कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं नए पंजीयन के लिए तारीख भी नहीं मिल पा रही है। त्योहार के दौरान जमीन की खरीद-बिक्री की उम्मीद लगाए बैठे पक्षकारों को अब तकनीकी अड़चनों और हड़ताल के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पटवारियों की हड़ताल का असर राजस्व से जुड़े कामकाज पर पड़ रहा है। जमीन संबंधी प्रक्रिया में जरूरी जानकारी और दस्तावेजों को लेकर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तकनीकी समस्याओं का असर अब रोजाना होने वाले पंजीयन पर भी दिखाई देने लगा है।
पहले जहां एक दिन में 50 से अधिक रजिस्ट्रियां आसानी से हो जाती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर 20 से 25 के आसपास रह गई है। इससे न केवल रजिस्ट्री कराने वाले पक्षकार, बल्कि दस्तावेज तैयार करने वाले और इस प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
आपको बता दें, कि प्रदेश में ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था का उद्देश्य पंजीयन को तेज और सुविधाजनक बनाना है, लेकिन सर्वर और ओटीपी की समस्या के चलते लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इसके आलावा, अगर रजिस्ट्री से प्राप्त होने वाले राजस्व संग्रह की बात करें, तो रजिस्ट्री के लिए दस्तावेजों की संख्या में कमी के बावजूद राजनांदगांव जिले ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व संग्रह के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया था। शासन ने जिले के लिए 98 करोड़ 50 लाख रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसके मुकाबले 104 करोड़ 37 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ,जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 106 प्रतिशत था। नई गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी को भी राजस्व संग्रह में वृद्धि की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
गत वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वर्ष रजिस्ट्री के लिए दस्तावेजों की संख्या कम रही। पिछले वित्तीय वर्ष में जिले में 17,799 दस्तावेज प्राप्त हुए थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या घटकर 16,247 रह गई। इस तरह कुल 1,552 दस्तावेज कम प्राप्त हुए। कार्यालयवार आंकड़ों में राजनांदगांव में 2,201, डोंगरगढ़ में 264, डोंगरगांव में 707 और छुरिया में 206 दस्तावेजों की कमी दर्ज की गई।
जिला पंजीयक सोनाली बोर्डे ने बताया कि कभी-कभी तकनीकी समस्याएं आती रहती हैं। हालांकि, तकनीकी व्यवस्था सुचारु होने पर ही पंजीयन की रफ्तार सामान्य होने की उम्मीद है। विभाग का पूरा जोर शासन द्वारा निर्धारित राजस्व लक्ष्य की पूर्ति पर है। फिलहाल पटवारियों की हड़ताल और ऑनलाइन व्यवस्था में आ रही दिक्कतों के बीच लोग रजिस्ट्री प्रक्रिया के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।